Short Film Mantra International Film Festival

Short Film Mantra International Film Festival "Short Film Mantra proudly celebrates 15 successful years of artistic legacy.

Abhishek GalsharlFestival DirectorlOTT Cinema Awards & Indie OTT Film FestivalFounder of Short Film Mantra
BloggerlVloggerl Promoting cinema, Talent.Surat and mumbai india On this special occasion, we now welcome entries of films released on OTT platforms, including web series, short films, and documentary films."

शबाना आज़मी: सिनेमा से समाज तक, एक बेखौफ आवाज़मैं आप सभी को बताना चाहता हूँ कि मैं किसी राजनीतिक पार्टी का सदस्य नहीं हू...
21/07/2026

शबाना आज़मी: सिनेमा से समाज तक, एक बेखौफ आवाज़

मैं आप सभी को बताना चाहता हूँ कि मैं किसी राजनीतिक पार्टी का सदस्य नहीं हूँ और न ही किसी का पक्ष लेता हूँ, लेकिन एक कलाकार होने के नाते मैं अपनी सच्ची भावनाएँ बता रहा हूँ।

भारतीय सिनेमा में शबाना आज़मी का नाम केवल एक उत्कृष्ट अभिनेत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि एक ऐसी नागरिक के रूप में भी लिया जाता है, जिन्होंने दशकों से सामाजिक और लोकतांत्रिक मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी है। उन्होंने कई बार सत्ता की परवाह किए बिना अपनी बात कही और जनहित के सवालों पर खुलकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

हाल ही में शबाना आज़मी "संसद चलो" विरोध मार्च में शामिल हुईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर यात्रा और प्रदर्शन के कई वीडियो साझा किए, जिनमें वे प्रदर्शनकारियों के साथ ट्रक में सफर करती और आगे बढ़ती दिखाई दीं। 75 वर्ष की आयु में भी उनका सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि सार्वजनिक जीवन में उनकी प्रतिबद्धता आज भी उतनी ही मजबूत है।

शबाना आज़मी का सार्वजनिक जीवन केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। वे वर्षों से महिलाओं के अधिकार, शिक्षा, सांप्रदायिक सद्भाव, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे मुद्दों पर मुखर रही हैं। उन्होंने कई जनआंदोलनों और नागरिक अभियानों में भाग लिया और समय-समय पर अपनी आवाज़ बुलंद की।

वे राज्यसभा की नामांकित सदस्य भी रह चुकी हैं और संसद में कला, संस्कृति तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर सक्रिय भागीदारी निभाई। उनका सार्वजनिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि एक कलाकार समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभा सकता है।

मेरे लिए शबाना आज़मी केवल एक महान अभिनेत्री नहीं हैं, बल्कि उनसे जुड़ी एक याद मेरे जीवन की अमूल्य धरोहर है।
सन् 1986 में, जब मैं स्वर्गीय सत्यदेव दुबे जी के मार्गदर्शन में थिएटर का प्रशिक्षण ले रहा था, तब मुझे शबाना आज़मी जी के साथ एक स्ट्रीट प्ले (नुक्कड़ नाटक) में अभिनय करने का अवसर मिला। उस समय मैंने उनके व्यक्तित्व में अनुशासन, सादगी और सामाजिक सरोकारों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को बहुत करीब से महसूस किया।

एक युवा रंगकर्मी के लिए यह अनुभव किसी पाठशाला से कम नहीं था। आज, जब उन्हें फिर से सामाजिक और लोकतांत्रिक मुद्दों पर सक्रिय देखता हूँ, तो 1986 की वही यादें ताज़ा हो जाती हैं।

हर कलाकार की राजनीतिक राय से सभी लोग सहमत हों, यह आवश्यक नहीं है। लोकतंत्र की खूबसूरती भी यही है कि विचार अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन जब कोई कलाकार अपने विश्वास के अनुसार समाज के बीच खड़ा होता है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखता है, तो वह नागरिक भागीदारी का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है।

शबाना आज़मी का सफर हमें यह याद दिलाता है कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद करने और बदलाव की प्रेरणा देने का भी सशक्त माध्यम हो सकती है।
Blog by Abhishek Galshar
Website www ottcinemaaward. com

21/07/2026

I have just visited CJP website and was really impressed by the Points mentioned in its manifesto. I believe everyone should know about them. I don’t know what the future holds for the CJP, but these ideas certainly deserve attention and discussion.

Note down Declared:

I have made it clear that I am not a member of any political party, but as a citizen of the country, it is my duty to ensure that interested people are aware of this matter.

घोषणापत्र पढ़िए।
इसे एक बार पढ़िए।फिर दोबारा पढ़िए।और उसके बाद इसे उस व्यक्ति तक ज़रूर पहुँचाइए, जिसे इसे पढ़ने की ज़रूरत है।

01️⃣यदि CJP सत्ता में आती है, तो किसी भी मुख्य न्यायाधीश को सेवानिवृत्ति के बाद इनाम के रूप में राज्यसभा की सीट नहीं दी जाएगी।

02️⃣यदि किसी भी वैध मतदाता का वोट हटाया जाता है—चाहे राज्य में CJP की सरकार हो या विपक्ष की—तो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को UAPA के तहत गिरफ्तार किया जाएगा, क्योंकि नागरिकों के मतदान के अधिकार को छीनना आतंकवाद से कम नहीं है।

03️⃣महिलाओं को 33% नहीं, बल्कि 50% आरक्षण दिया जाएगा—वह भी संसद की संख्या बढ़ाए बिना। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल के 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।

04️⃣अंबानी और अडानी के स्वामित्व वाले सभी मीडिया हाउसों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे, ताकि वास्तव में स्वतंत्र मीडिया के लिए रास्ता बनाया जा सके। ‘गोदी मीडिया’ के एंकरों के बैंक खातों की जांच की जाएगी।

05️⃣जो भी विधायक या सांसद एक राजनीतिक दल छोड़कर दूसरे दल में शामिल होगा, उसे 20 वर्षों तक चुनाव लड़ने और किसी भी सार्वजनिक पद पर रहने से प्रतिबंधित किया जाएगा।

लोकतंत्र में सवाल पूछना, जवाब मांगना और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाना हर नागरिक का अधिकार है।

17/07/2026

सोनम वांगचुक जी का 19 दिनों से जारी अनशन: इंसानी शरीर बिना भोजन कितने दिनों तक जीवित रह सकता है?

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जी के 19 दिनों से अधिक समय से जारी उपवास ने एक बेहद गंभीर और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सवाल खड़ा कर दिया है इंसानी शरीर बिना भोजन के आखिर कितने समय तक जीवित रह सकता है?

जहाँ बिना पानी के इंसान का जीवन आमतौर पर कुछ ही दिनों तक सीमित रह सकता है, वहीं विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त पानी मिलने पर मानव शरीर कई सप्ताहों तक अपने अंदर संचित ऊर्जा का उपयोग कर सकता है। कुछ परिस्थितियों में यह अवधि 2 से 3 महीने तक भी हो सकती है, हालांकि यह व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, शरीर में जमा वसा, पानी की उपलब्धता और चिकित्सकीय स्थिति पर निर्भर करती है।

इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि भूख हड़ताल या लंबे समय तक भोजन न मिलने पर मानव शरीर के अंदर वास्तव में क्या होता है।

पहले 24 घंटों में शरीर लिवर में जमा ग्लाइकोजन** को ग्लूकोज़ में बदलकर ऊर्जा प्राप्त करता है।
इसके बाद शरीर धीरे-धीरे फैट स्टोर्स का उपयोग करना शुरू करता है।

लंबे समय तक भोजन न मिलने पर शरीर कीटोसिस** की अवस्था में प्रवेश करता है, जहाँ वसा से ऊर्जा प्राप्त की जाती है।

जैसे-जैसे शरीर में ऊर्जा के स्रोत कम होते जाते हैं, शरीर मांसपेशियों और महत्वपूर्ण ऊतकों को भी ऊर्जा के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर सकता है।

अत्यधिक वजन कम होना शरीर के लिए गंभीर और जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है।

कुछ मेडिकल अध्ययनों के अनुसार, शरीर के वजन में लगभग 18 प्रतिशत तक की कमी गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, लंबे समय तक उपवास के दौरान हर व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रिया अलग होती है और ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय निगरानी बेहद आवश्यक होती है।

इस ब्लॉग में हम विज्ञान के साथ-साथ दिल्ली में चल रहे लद्दाख से जुड़े विरोध प्रदर्शनों और सोनम वांगचुक जी के आंदोलन की वर्तमान स्थिति को भी समझने की कोशिश करेंगे।

👉 दिल्ली में चल रहे इन विरोध प्रदर्शनों को लेकर आपकी क्या राय है?
क्या आपको लगता है कि इस आंदोलन के मुद्दों पर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद होना चाहिए?

अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें। 👇
Blog by Abhishek Galshar

Vote for India’s Best Stand-Up Comedians and Your Favourite Film Cast! Support your favourite performers and help decide...
25/06/2026

Vote for India’s Best Stand-Up Comedians and Your Favourite Film Cast!
Support your favourite performers and help decide the People’s Choice Winner at the OTT Cinema Awards 2026.
Nominees Include: The Mehta Boys – Cast• Khaalidhar Laapata – Cast• Gustakh Ishq – Cast• India’s Top Stand-Up Comedians
Your vote celebrates outstanding talent in Indian cinema and comedy.
Voting Period: 15 June 2026 – 5 July 2026 Vote Now: www.ottcinemaaward.com
Every vote counts. Show your support and make your voice heard!

25/06/2026

आधी रात का मैसेज

तलाक के बाद एक व्यक्ति ने अपनी पूर्व पत्नी को आधी रात में व्हाट्सऐप पर सिर्फ इतना मैसेज भेजा –
"मुझे नींद नहीं आ रही है, शायद तुम्हें भी नहीं आ रही होगी।"

पूर्व पत्नी ने उस मैसेज का स्क्रीनशॉट पुलिस को भेज दिया और शिकायत की कि वह रोज़ देर रात उसे परेशान करता है। पुलिस ने व्यक्ति को थाने बुलाकर पूछताछ की। उसने बताया कि वह उसकी पूर्व पत्नी है और उनके दो बच्चे भी हैं।

पूछताछ के दौरान पुलिस की मौजूदगी में व्यक्ति ने अपनी पूर्व पत्नी से फोन पर बात की और कहा, "मुझे पुलिस ने पकड़ा है, तुम कह दो कि मुझे छोड़ दें।"

तब महिला ने जवाब दिया, "एक लाख रुपये दे दो, तब मैं तुम्हें छुड़वाऊँगी।"

यह बात स्पीकर पर चल रही थी और पुलिस ने भी सुन ली। पुलिस को मामला ब्लैकमेलिंग का लगा। कहानी ने अचानक ऐसा मोड़ लिया कि शिकायत करने वाली महिला खुद कानूनी कार्रवाई के घेरे में आ गई।

सीख: रिश्ते खत्म हो सकते हैं, लेकिन झूठे आरोप और ब्लैकमेल किसी के लिए भी मुसीबत बन सकते हैं।

22/06/2026

एक अच्छी फ़िल्म की पहचान क्या है?
मैं बार-बार इस सवाल पर लौटता हूँ, खासकर तब जब हमारे देश में फ़िल्मों और कहानी कहने की कला के बदलते स्वरूप को देखता हूँ।
क्या एक अच्छी फ़िल्म उसकी तकनीकी उत्कृष्टता से परिभाषित होती है?
कहानी, पटकथा, अभिनय, बैकग्राउंड स्कोर, संगीत, संपादन या संवाद?
हाँ, किसी हद तक फ़िल्म अपने सभी हिस्सों का सम्मिलित परिणाम होती है।
लेकिन मेरे अनुसार सबसे महत्वपूर्ण बात फ़िल्म के ख़त्म होने के बाद होती है।
फ़िल्म आपको कैसा महसूस कराती है?
कल मैंने इम्तियाज़ अली की "मैं वापस आऊँगा" देखी, और आज भी वह मेरे साथ चल रही है।
यह फ़िल्म भारत के विभाजन पर आधारित है—एक ऐसी त्रासदी जो केवल विस्थापन तक सीमित नहीं थी। यह लाखों लोगों के घर, ज़मीन, यादें और पीढ़ियों की मेहनत से बनाई गई दुनिया के बिखर जाने की कहानी थी।
फ़िल्म चाहती तो इस विषय को एक भावनात्मक और हिंसक थ्रिलर में बदल सकती थी। लेकिन इम्तियाज़ अली ने एक अलग रास्ता चुना, और यही बात मेरे दिल को छू गई।
तकनीकी दृष्टि से यह एक परफेक्ट फ़िल्म नहीं है। कहीं-कहीं कहानी और पटकथा असमान लग सकती है। दिलजीत दोसांझ के स्टैंड-अप वाले हिस्से कुछ दर्शकों को बिखरे हुए महसूस हो सकते हैं। पहला भाग थोड़ा लंबा भी लग सकता है।
लेकिन सिनेमा हॉल से बाहर निकलते समय ये सारी बातें महत्वहीन हो जाती हैं।
काफ़ी समय बाद ऐसा हुआ कि फ़िल्म समाप्त होने के बाद मैं तुरंत अपनी सीट से उठ नहीं पाया। आँखें नम थीं और उस अनुभव से बाहर आने में कुछ समय लगा।
फिर अंत में दिलजीत दोसांझ का गीत सुनाई देता है, और ऐसा महसूस होता है मानो फ़िल्म कह रही हो—
"विभाजन की त्रासदी वास्तव में कभी समाप्त नहीं हुई। उसकी कहानी आज भी जारी है। केवल पात्र और स्थान बदल गए हैं।"
गीतों में बुल्ले शाह और संत कबीर की झलक दिखाई देती है। इरशाद कामिल साहब के शब्द और ए.आर. रहमान साहब का संगीत इस फ़िल्म को एक अलग ऊँचाई प्रदान करते हैं।
कुछ संवाद ऐसे हैं जैसे किसी अस्तित्ववादी नाटक से निकलकर आए हों।
दिलजीत का जीवन, करियर और अपने अस्तित्व को लेकर संघर्ष मुझे तमाशा की एक परिपक्व अगली कड़ी जैसा लगा। प्रेम के बारे में फ़िल्म की समझ भी बेहद गहरी है।
यह फ़िल्मी रोमांस वाला प्रेम नहीं है।
यह वह शांत प्रेम है, जिसे हम सभी अपने भीतर कहीं खोजते रहते हैं।
और फिर आते हैं नसीरुद्दीन शाह साहब।
75 वर्ष की आयु में उन्होंने 95 वर्षीय डिमेंशिया पीड़ित व्यक्ति का किरदार निभाया है। पूरे समय वे टूटी-बिखरी यादों, अधूरे वाक्यों और समय के खोए हुए एहसास के साथ दिखाई देते हैं।
फिर भी वे उस चरित्र का सम्पूर्ण भार अपने कंधों पर उठाए रखते हैं।
उन्हें देखकर याद आया कि महान अभिनय हमेशा ऊँची आवाज़ या लंबे संवादों का मोहताज नहीं होता।
कई बार एक काँपता हुआ चेहरा और एक अधूरा वाक्य ही काफी होता है।
मैं लगभग भूल चुका था कि अच्छा भारतीय सिनेमा कैसा महसूस होता है।
इसके लिए इम्तियाज़ अली जी का धन्यवाद।
सीजीआई और शोर-शराबे को सिनेमा कहकर परोसने के इस दौर में यह फ़िल्म एक ताज़ी हवा के झोंके जैसी लगी।
यदि इस सप्ताहांत आपके पास समय हो, तो "मैं वापस आऊँगा" अवश्य देखिए।
लेकिन केवल कहानी पर ध्यान मत दीजिए।
संवादों को सुनिए।
खामोशियों को महसूस कीजिए।
गीतों को आत्मसात कीजिए।
और सबसे महत्वपूर्ण—पात्रों के चेहरों को देखिए।
क्योंकि यही वह जगह है जहाँ यह फ़िल्म वास्तव में जीवित है।
समीक्षा: अभिषेक गलशर
अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ: www.ottcinemaaward.com

17/06/2026

સિનેપ્સિસ – મિલકત આકારણી અને માલિકી વિવાદ

એક યુવાન દંપતી મિલકત આકારણી વિભાગમાં જરૂરી દસ્તાવેજોની ફાઇલ લઈને આવે છે. તેઓ અધિકારી સમક્ષ પોતાના દસ્તાવેજો રજૂ કરીને વિનંતી કરે છે:

યુવાન કહે છે:
"સાહેબ, આ અમારી મિલકતના દસ્તાવેજો છે. અમે મિલકતની આકારણી માટે અરજી કરવા માંગીએ છીએ."

ત્યારબાદ એક વરિષ્ઠ નાગરિક જૂના મૂળ માલિકીના દસ્તાવેજો, નકશાઓ અને રેકોર્ડ્સ સાથે કચેરીમાં પ્રવેશ કરે છે. તેઓ શાંત પરંતુ ચિંતિત દેખાય છે.

વરિષ્ઠ નાગરિક કહે છે:
"સાહેબ, આ મારા મૂળ દસ્તાવેજો છે. સામાન્ય માર્ગ (કોમન પાસેજ) અંગે વિવાદ હોવાની શક્યતા છે. કૃપા કરીને તમામ રેકોર્ડ્સ અને દસ્તાવેજોની કાળજીપૂર્વક ચકાસણી કરો."

અધિકારી બંને પક્ષોના દસ્તાવેજો, જૂના નકશાઓ, માલિકીના રેકોર્ડ્સ અને આકારણી સંબંધિત ફાઇલોની તપાસ શરૂ કરે છે.

વર્ણન (Narration):

"એક જ જગ્યા પર અલગ-અલગ પક્ષો હકનો દાવો કરે ત્યારે મિલકત સંબંધિત વિવાદો ઊભા થઈ શકે છે. આવી પરિસ્થિતિમાં મૂળ દસ્તાવેજો, મ્યુનિસિપલ રેકોર્ડ્સ અને કાયદેસર માલિકીની સંપૂર્ણ ચકાસણી કરવી જરૂરી છે. પારદર્શિતા, પુરાવા અને યોગ્ય કાનૂની પ્રક્રિયા તમામ પક્ષોના અધિકારોનું રક્ષણ કરે છે અને ન્યાયસંગત નિર્ણય લેવામાં મદદ કરે છે."

14/06/2026

The Creator: The person who modified and created the distinct Indian hand-pumped harmonium was Dwarkanath Ghose, a skilled instrument maker and founder of the renowned Kolkata-based company Dwarkin.

13/06/2026

A simple auto ride in Mumbai turned into a powerful lesson in honesty.

While rushing to an important client meeting, a businessman accidentally paid ₹15,682 instead of ₹156 to an auto-rickshaw driver. Realizing the mistake, the driver patiently waited for him to return, informed him about the accidental transfer, and immediately returned the excess amount.

What made the story even more remarkable was that the driver reportedly refused to accept even the original fare, saying he did not want to add to the passenger's stressful day.

In a world where negative news often dominates headlines, stories like these remind us that honesty, integrity, and kindness still exist all around us.

❤️ A true example of humanity.
👏 Salute to the auto driver for his honesty.

GoodNews AutoDriver FaithInHumanityRestored ViralStory Respect

12/06/2026

🎬 Vote for The Mehta Boys!
Support your favourite film and cast today. Cast your vote and help them win at the OTT Cinema Awards 2026.
Voting Period: 15 June 2026 – 5 July 2026
Vote Now: www.ottcinemaaward.com

Address

305 Blu/Trio Commercial Shoping Centre, Green City, Gauvar Path Road, Pal-Path Adajan
Surat
394510

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Short Film Mantra International Film Festival posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Short Film Mantra International Film Festival:

Shortcuts

Share