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At Kissa TV, You will find the information about forgotten and less popular actors. किस्सा टीवी एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो मुख्यतौर पर सिनेमा व सिने कलाकारों के बारे में बात करता है। खासतौर पर गुज़रे ज़माने की फिल्में व कलाकारों को किस्सा टीवी याद करता है। हालांकि इतिहास, खेल और देश व दुनिया की रोचक जानकारियां भी किस्सा टीवी समय-समय पर साझा करता रहता है।

23/06/2026

Kamal Amrohi Kishor Sahu Dil Apna Aur Preet Parayi

श्रीराम राघवन ने यूं तो कुछ बड़ी ही बेहतरीन फिल्मों का डायरेक्शन किया है। लेकिन मेरी सबसे पसंदीदा अंधाधुन है। एंड आई एम ...
22/06/2026

श्रीराम राघवन ने यूं तो कुछ बड़ी ही बेहतरीन फिल्मों का डायरेक्शन किया है। लेकिन मेरी सबसे पसंदीदा अंधाधुन है। एंड आई एम श्योर मेरे जैसे और भी जाने कितने ही लोग होंगे जिन्हें अंधाधुन बहुत अच्छी लगी होगी।

श्रीराम राघवन को अंधाधुन फिल्म बनाने का आईडिया एक फ्रेंच शॉर्ट फिल्म से मिला था। और अगर आप अंधाधुन देखेंगे तो आपको इसके क्रेडिट्स में उस फ्रेंच फिल्म का ज़िक्र भी मिलेगा।

अंधाधुन का वो सीन जब सिमी अपने प्रेमी संग मिलकर अपने पति की हत्या के सबूत मिटा रही होती है और आयुष्मान खुराना का किरदार पियानो प्ले कर रहा होता है, इससे काफी मिलता-जुलता एक सीन सैफ अली खान की फिल्म एजेंट विनोद में भी है।

एजेंट विनोद के गीत राब्ता में एक अंधी लड़की पियानो बजाती है और गीत चल रहा होता है। जबकी बैकग्राउंड में काफी ड्रामा भी चल रहा होता है। इत्तेफाक से एजेंट विनोद का निर्देशन भी श्रीराम राघवन ने ही किया था।

श्रीराम राघवन ने बदलापुर, जॉनी गद्दार और एक हसीना थी जैसी फिल्मों का भी डायरेक्शन किया है। कुछ महीने पहले इनकी एक फिल्म आई थी जिसमें कैटरीना कैफ व विजय सेतूपति मुख्य भूमिकाओं में थे।

उस फिल्म का नाम था मैरी क्रिसमस। वो फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गई थी। कुछ लोग कहते हैं कि वो श्रीराम राघवन की इकलौती फिल्म है जिसे दर्शकों ने इस तरह से नकारा था।

आज श्रीराम राघवन जी का जन्मदिन है। 22 जून 1963 को मुंबई में ही श्रीराम राघवन जी का जन्म हुआ था। फिल्मी दुनिया में करियर बनाने की प्रेरणा इन्हें अपनी माता जी से मिली थी जो कि फिल्मों की दीवानी थी। जबकी इनके पिता तो एक बोटनिस्ट थे। इन्होंने FTII पुणे से फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखी थी। FTII में इनके बैचमेट थे राजकुमार हिरानी।

FTII में ही स्टूडेंट प्रोजेक्ट के तौर पर श्रीराम राघवन ने 'दि एट कॉलम अफेयर' नाम की एक फिल्म बनाई थी जिसे साल 1987 में नेशनल अवॉर्ड मिला था। और उस फिल्म को इनके सहपाठी राजकुमार हिरानी ने एडिट किया था।

श्रीराम राघवन के भाई श्रीधर राघवन भी फिल्मी दुनिया से जुड़े हैं। वो एक लेखक हैं और उन्होंने भी कुछ फिल्मों व टीवी शोज़ की कहानी लिखी है। किस्सा टीवी की तरफ से श्रीराम राघवन जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं।

कोई फ़िल्म कैसे एक छोटे कलाकार की ज़िंदगी बदलकर रख देती है उसकी मिसाल है आमिर-माधुरी की दिल फ़िल्म। वो छोटा कलाकार थे कि...
22/06/2026

कोई फ़िल्म कैसे एक छोटे कलाकार की ज़िंदगी बदलकर रख देती है उसकी मिसाल है आमिर-माधुरी की दिल फ़िल्म। वो छोटा कलाकार थे किशोर भानूशाली जी। वही किशोर भानूशाली जिन्हें दुनिया देव आनंद के डुप्लीकेट के तौर पर अदिक जानती-पहचानती है।

जब VHS-VCR का दौर था तब फ़िल्म नगरी मुंबई में संघर्ष कर रहे बहुत से जूनियर कलाकारों को उन फ़िल्मों में काम मिल जाता था जो बस VHS-VCR के लिए बनती थी। किसी सिनेमाघर में वो फ़िल्में रिलीज़ नहीं होती थी। लोग उन फ़िल्मों को अपने घर पर, VCP पर देखा करते थे।

किशोर भानूशाली भी तब ऐसी ही फ़िल्मों में काम किया करते थे। एक दिन किशोर भानूशाली को एक वीडियो फ़िल्म वाले ने जानकारी दी कि बैंड स्टैंड पर स्थित पारसी बंगले में एक फ़िल्म की शूटिंग चल रही है। वहां पहुंच जाओ। तुम्हें भी कुछ काम मिल जाएगा शायद।

किशोर भानूशाली पारसी बंगले पर पहुंच गए। साथियों उस दिन जिस फ़िल्म की शूटिंग पारसी बंगले पर हो रही थी वो थी आमिर खान-माधुरी दीक्षित की दिल। दिल फ़िल्म की शूटिंग चल रही थी वहां। और सीन था पार्टी वाला। उस सीन को शूट करने के लिए डायरेक्टर इंदर कुमार ने कई जूनियर आर्टिस्ट्स को बुलाया था जो नौजवान लड़के-लड़कियां थे।

उन नौजवान लड़के-लड़कियों में अधिकतर ऐसे लोग थे जो बहुत बढ़िया डांस कर रहे थे। उन लोगों को देखकर किशोर भानूशाली को चिंता होने लगी। क्योंकि किशोर जी को तो डांस करना बिल्कुल भी नहीं आता था। किशोर भानूशाली को लगा कि इनका इस फ़िल्म में कुछ नहीं हो सकता।

तो हुआ ये कि किशोर भानुशाली एक कोने में चुपचाप बैठ गए और दूसरों को डांस-एक्ट करते देखने लगे। इत्तेफ़ाक से किशोर भानुशाली के एक दोस्त ने इन्हें देख लिया। क्योंकि वो दोस्त भी तब वहीं पर था। वो दोस्त किशोर जी के पास आया और उसने पूछा कि यहां कोने में क्यों बैठे हो? सबके बीच में रहो। तभी तो फ़िल्म में दिखोगे।

तब किशोर भानुशाली जी ने उस दोस्त को बताया,"इनके बीच में मैं क्या करूंगा। मुझे तो डांस नहीं आता।" इनकी बात सुनकर उस दोस्त ने इन्हें एक सलाह दी। उसने कहा,"डांस की फ़िक्र तुम मत करो। तुम बस देव साहब के जैसी एक्टिंग करो। वही जमेगी।"

उस दोस्त की बात किशोर भानूशाली को भी सही लगी। इन्होंने फौरन जेब से अपना रुमाल निकाला और उसे गले में बांध लिया। फिर देव साहब की तरह टेढ़ी गर्दन करके ये उनके जैसी ही एक्टिंग करते हुए यहां-वहां घूमने लगे। और जब पार्टी वाला वो शॉट खत्म हुआ तो दिल फिल्म के डायरेक्टर इंद्र कुमार ने इन्हें बुलाया।

इंद्र कुमार ने किशोर भानुशाली जी की खूब तारीफ की उस दिन। और अगले दिन भी आने को कहा। किशोर भानुशाली अगले दिन फिर दिल की शूटिंग में पहुंचे। डायरेक्टर इंद्र कुमार ने किशोर जी को अनुपम खेर के साथ एक सीन शूट करने का मौका दिया। और किशोर भानुशाली ने एक ही टेक में वो पूरा सीन शूट कर दिया। सभी ने किशोर भानुशाली जी के लिए तालियां बजाई।

कुछ देर बाद आमिर खान भी वहां आए। इंद्र कुमार ने आमिर को किशोर भानुशाली के सीन के बारे में बताया। आमिर इतना ज़्यादा एक्सायटेड हुए कि उन्होंने किशोर जी से एक बार फिर से वो पूरा सीन रिपीट करने को कहा।

किशोर भानुशाली ने एक बार फिर अनुपम खेर के साथ वो सीन दोबारा किया। और वो सीन आमिर को इतना ज़्यादा पसंद आया कि उन्होंने डायरेक्टर इंद्र कुमार से कह दिया कि किशोर को वो पूरी फिल्म में लेना चाहते हैं।

यहीं से किशोर भानुशाली की ज़िंदगी पूरी तरह से बदल गई। दिल फिल्म रिलीज़ हुई और सुपरहिट साबित हुई। किशोर भानुशाली का काम हर किसी को पसंद आया। दिल फिल्म के इस रोल के लिए किशोर भानुशाली को कई अवॉर्ड्‌स से भी सम्मानित किया गया। और इनके पास फिल्मों का ढेर लग गया।

किशोर भानुशाली ने कई फिल्मों में काम किया। टीवी शोज़ में भी ये खूब नज़र आए। रिएलिटी शोज़ और कॉमेडी शोज़ में ये गेस्ट अपीयरंस देते रहे। देश-विदेश में इन्होंने ढेरों स्टेज शोज़ भी किए। और आज भी ये शोज़ करते रहते हैं। साथ ही एक्टिंग प्रोजेक्ट्स में भी नज़र आते रहते हैं।

साथियों आज दिल फ़िल्म को रिलीज़ हुए 36 साल पूरे हो गए हैं। 22 जून 1990 के दिन दिल फ़िल्म रिलीज़ हुई थी और सुपरहिट साबित हुई थी। ठीक इसी दिन सनी देओल की घायल भी रिलीज़ हुई थी। और घायल भी बहुत ज़बरदस्त चली थी। घायल फ़िल्म की बात एक लेख में हम कर ही चुके हैं।

सैकनिल्क डॉ कॉम के मुताबिक, 2 करोड़ रुपए के बजट में बनी दिल ने 7 करोड़ रुपए की कमाई की थी और ब्लॉकबस्टर घोषित की गई थी। कहीं-कहीं पर बताया जाता है कि दिल का बजट 2 करोड़ 30 लाख रुपए था। और कमाई 10 करोड़ रुपए थी। इनमे से सही फ़िगर क्या है, नहीं पता।

दिल को इंद्र कुमार ने डायरेक्ट किया था। ये इंद्र कुमार की पहली फ़िल्म थी एज़ ए डायरेक्टर। इंद्र कुमार के छोटे भाई व जाने-पहचाने अभिनेता आदि ईरानी ने भी इस फ़िल्म में अभिनय किया था। संगीत आनंद-मिलिंद ने दिया था। और सभी गीत लिखे थे समीर जी ने।

दिल फ़िल्म में एक दृश्य है जिसमें आमिर खान माधुरी के घर में चुपके से घुसते हैं और माधुरी के पिता बने अभिनेता सईद जाफ़री उन्हें देख लेते हैं। सईद जाफ़री आमिर खान को धमकी देते हैं। लेकिन आमिर खान वहीं पर एक स्टूल को तोड़कर उसे जला देते हैं और फिर उस स्टूल की अग्नि के सात फेरे लेते हैं।

इस सीन को लेकर आमिर खान और डायरेक्टर इंद्र कुमार के बीच काफ़ी बहस हुई थी। आमिर खान को ये सीन सही नहीं लग रहा था। आमिर खान ने इंद्र कुमार से कहा था कि ऐसे कैसे हो सकता है कि कोई स्टूल तोड़कर उसमें आग जला दे और किसी से शादी कर ले। ये तो एकदम अनरियलिस्टिक है।

मगर इंद्र कुमार का कहना था कि इस सीन में कुछ भी गलत नहीं है। ये सीन पब्लिक को पसंद आएगा। सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर 1 बजे तक आमिर खान और इंद्र कुमार इस बात पर बात करते रहे। या कहना चाहिए कि बहस करते रहे कि ये दृश्य शूट करना चाहिए कि नहीं।

सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में इंद्र कुमार ने बताया था कि आमिर ने उनसे कहा था,"इंदू तू पागल हो गया है। स्टूल तोड़कर कोई शादी करता है?" लेकिन इंद्र कुमार ने आमिर से कहा कि वो शर्त लगाकर कहते हैं कि ये सीन चलेगा और ज़रूर चलेगा।

इंद्र कुमार के इतना कॉन्फ़िडेंस दिखाने पर आमिर खान ने वो सीन वैसे ही शूट किया। और वाकई में, जबक दिल फ़िल्म रिलीज़ हुई तो लोगों को वो सीन बहुत पसंद आया।

गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म की कहानी काल्पनिक नहीं है। एक वक्त पर धनबाद और वासेपुर में वाकई में इस तरह का माफिया राज चला करत...
22/06/2026

गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म की कहानी काल्पनिक नहीं है। एक वक्त पर धनबाद और वासेपुर में वाकई में इस तरह का माफिया राज चला करता था। रामाधीर सिंह का किरदार किसी वक्त में झारखंड के झरिया से विधायक रहे सूरजदेव से प्रेरित है। फिल्म में दिखाया गया है कि सरदार खान रामाधीर सिंह के लिए सिर का दर्द बन जाता है।

तब मंदिर में एक आदमी रामाधीर सिंह को सलाह देता है कि अगर मुसलमानों से लड़ना है तो उन्हें अपने साथ जोड़ लो। और रामाधीर सिंह को सलाह देने वाले उस आदमी का गैटअप भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से मिलता जुलता है। बताया जाता है कि एक वक्त था जब सुरजदेव सिंह को वास्तव में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर राजनीति में गाइड किया करते थे। यानि उस आदमी का किरदार पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर पर आधारित है।

गैंग्स ऑफ वासेपुर में गालियों की भरमार है। इतना ही नहीं, इस फिल्म में कई ऐसे सीन्स हैं जिसमें काफी मार-काट और खून खराबा दिखाया गया है। यही वजह है कि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को ए सर्टिफिकेट यानि एडल्ट्स ओनली सर्टिफिकेट के साथ रिलीज़ होने की परमिशन दी थी। फिल्म में दिखाए गए इस ज़बरदस्त खून खराबे की वजह से कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों ने तो इस फिल्म को अपने यहां रिलीज़ तक होने नहीं दिया था।

गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म की शूटिंग करने से पहले कई दिनों तक अनुराग कश्यप इस बात को लेक माथा-पच्ची कर रहे थे कि सरदार खान के घर के सीन्स कहां शूट करें। उन्हें कोई परफेक्ट लोकेशन मिल ही नहीं रही थी। फाइनली उन्होंने रुख किया अपने पुश्तैनी घर का जो कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास ओबरा में मौजूद है। ये वो घर है जहां अनुराग कश्यप के छोटे भाई और नामी डायरेक्टर अभिनव कश्यप का जन्म हुआ था। अभिनव कश्यप ने ही सलमान खान की सुपरहिट फिल्म दबंग डायरेक्ट की थी।

गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म का काफी हिस्सा बनारस में शूट किया गया था। बनारस में शूटिंग के दौरान ही एक बड़ा दुखद हादसा भी हो गया था। दरअसल सोहिल शाह नाम का एक शख्स इस फिल्म से बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर जुड़ा था। एक पतले से पुल पर जब फिल्म का एक सीन फिल्माया जा रहा था। तभी अचानक हादसा हो गया और जीप पुल से नीचे गिर पड़ी। इस हादसे में सोहिल शाह के सिर में बेहद गंभीर चोट लग गई। सोहिल शाह की तत्काल मृत्यु हो गई। सोहिल शाह को फिल्म के ओपनिंग क्रेडिट्स में ट्रिब्यूट भी दी गई थी।

गैंग्स ऑफ वासेपुर में अभिनेता पीयुष मिश्रा ने सरदार खान के मुंहबोले चाचा नसीर का रोल निभाया था। हालांकि पहले डायरेक्टर अनुराग कश्यप चाहते थे कि पीयुष मिश्रा रामाधीर सिंह का रोल निभाएं। नसीर के रोल के लिए उन्होंने तिग्मांशु धूलिया को अप्रोच किया था। लेकिन चूंकि पीयुष मिश्रा को नसीर का रोल ज़्यादा पसंद आ रहा था तो उन्होंने वही रोल निभाने की बात अनुराग कश्यप से कही। और इस तरह रामाधीर सिंह के रोल के लिए तिग्मांशु धूलिया को साइन कर लिया गया।

साथियों गैंग्स ऑफ़ वासेपुर फ़िल्म के आज 14 साल पूरे हो गए हैं। 22 जून 2012 के दिन ये फ़िल्म रिलीज़ हुई थी। मैंने ये फ़िल्म मेरठ के अप्सरा सिनेमा में देखी थी एक दोस्त के साथ। बड़ी सही फ़िल्म लगी थी ये। इस फ़िल्म की ऐसी ही और भी कई सारी कहानियां हैं जिन्हें काफ़ी पहले हमने एक लेख में मेंशन किया था। वो लेख कमेंट सेक्शन में मौजूद है। पढ़ लीजिएगा। और इस फ़िल्म के बारे में अपनी प्रतिक्रिया भी दीजिएगा।

"क्या होता है ये वेज बर्गर?" उस अमेरिकी महिला ने बड़ी हैरानी से टॉम ऑल्टर से पूछा। टॉम ऑल्टर को आभास हो गया कि इस अमेरिक...
22/06/2026

"क्या होता है ये वेज बर्गर?" उस अमेरिकी महिला ने बड़ी हैरानी से टॉम ऑल्टर से पूछा। टॉम ऑल्टर को आभास हो गया कि इस अमेरिकन महिला को वेज बर्गर शब्द सुनकर इतनी हैरानी क्यों हो रही है।

टॉम साहब ने उस अमेरिकी महिला को एक्सप्लेन किया कि वो क्या मांग रहे हैं और क्यों मांग रहे हैं। उस महिला ने टॉम साहब का ऑर्डर तो ले लिया। लेकिन उसका दिमाग भन्नाया हुआ था कि ये वेज बर्गर क्या बला है? उस दौर में वेज बर्गर जैसी किसी चीज़ का कभी नाम अमेरिकियों ने सुना ही नहीं था।

साथियों आज टॉम साहब का जन्मदिन है। टॉम ऑल्टर साहब का। 22 जून 1950 को टॉम ऑल्टर जी का जन्म हुआ था। और आज जो टॉम साहब का किस्सा आप किस्सा टीवी पर पढ़ने जा रहे हैं, वो पढ़ते हुए आपको लगेगा जैसे किसी हॉलीवुड फ़िल्म की कहानी आप पढ़ रहे हों। मैं ये कहानी पहले भी क़िस्सा टीवी पर शेयर कर चुका हूं।

आज टॉम साहब के जन्मदिन के मौके पर फ़िर से शेयर कर रहा हूं। ताकि क़िस्सा टीवी के साथ जुड़े नए लोग भी इस कहानी से रूबरू हो सकें। इस किस्से में क्रिकेट भी शामिल है। और क्रिकेट वाले किस्से का ज़िक्र तो मिथुन दा की बायोग्राफ़ी में भी मिलता है।

वैसे मैं ये किस्सा टॉम साहब के पुत्र जेमी ऑल्टर जी की एक यूट्यूब वीडियो के हवाले से लिख रहा हूं। जेमी जी का आभार। शुरू करते हैं ये बहुत शानदार किस्सा। पसंद आए तो लाइक-शेयर कर दीजिएगा।

ये किस्सा मिथुन दा की फिल्म रुख़्सत की शूटिंग के दौरान की। रुख़्सत रिलीज़ भले ही 1988 में हुई हो। लेकिन इस फिल्म की शूटिंग काफी पहले से चल रही थी। 1983 में जब कपिल देव जी के नेतृत्व वाली टीम इंडिया ने वेस्ट इंडीज़ को हराकर पहला क्रिकेट विश्वकप भारत को दिलाया था तब भी इस फिल्म की शूटिंग चल रही थी। वो भी अमेरिका में।

इस फिल्म की अधिकतर शूटिंग अमेरिका में ही हुई थी। रुख़्सत सिमी गरेवाल की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म थी। 1983 का वर्ल्ड कप खत्म होने के बाद भारतीय टीम अमेरिका के दौरे पर गई थी। वहां उसे कुछ एग्ज़ीबिशन मैचेस खेलने थे। उसी दौरान अमेरिका के रोड आइलैंड में रुख़्सत फिल्म की शूटिंग भी चल रही थी।

चूंकि रोड आइलैंड में भारतवंशियों की भी अच्छी-खासी तादाद है तो वहां भारतवंशियों के लिए अलग से एक अखबार भी निकलता था। रुख़्सत में टॉम ऑल्टर साहब ने भी एक अमेरिकी पुलिस अफसर का किरदार निभाया था। टॉम ऑल्टर जी ने ही उस अखबार में टीम इंडिया के एग्ज़ीबिशन मैच का एक विज्ञापन देखा। और टॉम ऑल्टर साहब तो थे ही क्रिकेट के बड़े वाले शौकीन।

टीम इंडिया का वो मैच न्यूजर्सी में था जो कि रोड आइलैंड के पास ही मौजूद है। टॉम ऑल्टर जी ने मिथुन दा से बताया कि भारतीय टीम अमेरिका में मैच खेलने आई है। और अगला मैच जहां होगा वो जगह पास में ही मौजूद है। ये सुनकर मिथुन दा बड़े एक्साइट हुए। फिर टॉम ऑल्टर व मिथुन दा फिल्म के प्रोड्यूसर के पास गए और उन्होंने रिक्वेस्ट की, कि हमें मैच देखने के लिए एक ब्रेक दिया जाए।

इत्तेफाक से जिस दिन मैच था उस दिन शूटिंग नहीं होनी थी। सो मिथुन दा व टॉम ऑल्टर जी को मैच देखने जाने की परमिशन मिल गई। मिथुन दा ने तीन टिकट खरीदे। अपने लिए, टॉम ऑल्टर जी के लिए व अपने मेकअप मैन के लिए भी। तीनों उसी शाम मैच देखने न्यूजर्सी निकल गए।

अमेरिका के उस दौरे पर 1983 वर्ल्ड कप की पूरी भारतीय टीम थी। सिवाय कपिल देव और के.श्रीकांत जी को छोड़कर। वहीं अमेरिका की टीम में वेस्ट इंडीज़ के तब के दिग्गज खिलाड़ी एलविन कालीचरण शामिल थे। मिथुन दा व टॉम ऑल्टर साहब जब शाम को न्यूजर्सी पहुंचे, तो वो सीधे सुनील गावस्कर से मिलने पहुंच गए।

गावस्कर साहब से इनकी मुलाकात हुई और काफी बातें भी हुई। बातचीत के दौरान गावस्कर साहब ने कुछ ऐसा कहा जिसे सुनकर मिथुन दा और टॉम ऑल्टर साहब अपने कानों पर यकीन ना कर सके। गावस्कर ने कहा कि अगर टॉम ऑल्टर व मिथुन चाहें तो वो दोनों भारत की तरफ से इस मैच में खेल सकते हैं।

ये बहुत बड़ी बात थी। और इन दोनों के लिए एक बहुत अच्छा मौका भी। इसलिए दोनों ने गावस्कर साहब से कहा कि वो ज़रूर खेलेंगे। अगली सुबह मैच शुरू हुआ। कप्तान सुनील गावस्कर ने टॉस जीतकर फील्डिंग करने का फैसला लिया। और जानते हैं ऑपनिंग ओवर उन्होंने किससे कराया? अपने मिथुन दा से।

मिथुन जब मैदान पर उतरे तो उन्हें देखकर दर्शक तालियां और सीटियां बजाने लगे। खासतौर पर भारतीय मूल के दर्शक। आयोजकों ने मिथुन दा की फिल्म डिस्को डांसर के गाने बजाने शुरू कर दिए। सोचिए क्या नज़ारा रहा होगा उस दिन।

खैर, कुछ ओवर्स के बाद गावस्कर साहब ने टॉम ऑल्टर जी को बॉल थमा दी। यानि अब टॉम ऑल्टर साहब को बॉलिंग करनी थी। वो लम्हा टॉम ऑल्टर साहब के लिए बड़ा भावुक करने वाला लम्हा था।

क्योंकि एक वक्त था जब वो ख्वाब देखते थे कि एक दिन वो भी टीम इंडिया के लिए क्रिकेट खेलेंगे। बहरहाल, टॉम ऑल्टर साहब ने बॉलिंग शुरू की। और उस ओवर में उन्होंने USA टीम के कैप्टन को LBW आउट कर दिया।

उस विकेट के बाद टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने टॉम ऑल्टर जी को गले लगा लिया। बकौल टॉम ऑल्टर, समय जैसे थम सा गया था तब। उन्हें लगा जैसे वो अपने सपने को जी रहे हैं।

मैदान तालियों के शोर से गूंज रहा था। और टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर रखा था। वो उन्हें बधाई दे रहे थे। तारीफ कर रहे थे। बहुत स्पेशल दिन था वो टॉम ऑल्टर साहब के लिए।

ब एक और किस्सा भी जान लेते हैं। ये किस्सा भी बड़ा ही रोचक है। जैसा कि ऊपर मैंने बताया था कि टॉम ऑल्टर जी इस फिल्म में अमेरिकन पुलिस अफसर बने थे तो ये कहानी उसी रोल से जुड़ी है।

फिल्म की कहानी के मुताबिक टॉम ऑल्टर का किरदार है तो अमेरिकन पुलिस के अफसर। लेकिन चूंकि वो सालों से इंडियन कस्टम डिपार्टमेंट से जुड़ा था तो उसे हिंदी बहुत अच्छी तरह से बोलनी-समझनी आती है। फिल्म में टॉम ऑल्टर जी के जितने भी दृश्य हैं वो सब अमेरिकन पुलिस की वर्दी में हैं।

एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि फिल्म की शूटिंग के बाद क्य्रू के कुछ मेंबर्स को भूख लगी। उस वक्त तक यूनिट के लिए बनाया जाने वाला खाना खत्म हो चुका था। यानि अब खाने के लिए बाहर ही जाना पड़ता। मसला ये था कि जिन क्र्यू मेंबर्स को भूख लगी थी वो वेजेटेरियन थे। और अमेरिका में रात के वक्त किसी जगह वेज खाना ढूंढना एक चुनौतीपूर्ण काम था।

टॉम ऑल्टर साहब को जब पता चला कि कुछ लोगों को भूख लगी है तो वो उन्हें खाना खिलाने चल दिए। उन्होंने एक टैक्सी ली और रोड आइलैंड की सड़कों पर देर रात रेस्टोरेंट की तलाश में निकल पड़े। टैक्सी वाले ने उन सभी को एक पब के बाहर उतार दिया और कहा कि इस वक्त तो आपको यहीं पर कुछ खाने के लिए मिल सकता है।

टॉम ऑल्टर व बाकि सब उस पब में चले गए। टॉम ऑल्टर उस पब के काउंटर पर गए और उन्होंने पूछा कि खाने में क्या मिलेगा? काउंटर पर एक महिला थी। उसने शक व घबराई हुई नज़रों से टॉम ऑल्टर साहब की तरफ देखा और कुछ सेकेंड्स में जवाब दिया। वो बोली,"इस समय तो बर्गर्स ही मिल सकेंगे।"

टॉम ऑल्टर ने उससे कहा कि एक हैम बर्गर लाइए और तीन वेज बर्गर्स। वो महिला थोड़ी कन्फ्यूज़ हुई। उसने टॉम साहब से पूछा,"ये वेज बर्गर क्या होता है?" टॉम ऑल्टर साहब समझ गए कि उस महिला की दुविधा क्या है। दरअसल, अमेरिका के लोग वेज बर्गर जैसी चीज़ को जानते ही नहीं थे तब। इसिलिए वो महिला कन्फ्यूज़ हो रही थी।

टॉम साहब ने उससे कहा कि अगर आपके पास कोई बिना मांस वाली पैटी है तो बर्गर में उसे लगा दीजिए। अगर नहीं है तो बर्गर के बीच में बस कुछ पत्ते, खीरा और टमाटर रख दें।

उस महिला की हैरत खत्म तो नहीं हुई। लेकिन उसने टॉम साहब का ऑर्डर ले लिया। ऑर्डर आता उससे पहले टॉम साहब ने नोटिस किया कि पब के अंधेरे कोने में चार-पांच आदमी बैठे हैं। और वो आदमी भी उन्हें शक व घबराई नज़रों से देख रहे हैं।

टॉम साहब को समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा हो क्यों रहा है? क्यों वो महिला और वो सब आदमी उन्हें ऐसे शक की नज़रों से घूर रहे हैं? क्यों घबरा रहे हैं? थोड़ी देर बाद टॉम साहब का ऑर्डर आ गया। इन सभी ने जल्दी से अपना खाना फिनिश किया और फिर वहां से निकल लिए।

बाहर आकर उन्होंने अपने होटल के लिए एक टैक्सी ली और वहां से चल दिए। कुछ देर बाद टैक्सी ड्राइवर ने टॉम ऑल्टर साहब से पूछा कि क्या आप सच में पुलिस अफसर हो? बस, उसी वक्त टॉम ऑल्टर को समझ में आ गया कि उस पब के काउंटर वाली वो महिला व वो चार-पांच आदमी उन्हें देखकर क्यों घबरा रहे थे।

दरअसल, शूटिंग के बाद टॉम ऑल्टर ने अपनी कॉस्ट्यूम चेंज ही नहीं की थी। वो उन क्यू मेंबर्स को अपनी शूटिंग वाली अमेरिकन पुलिस की वर्दी में ही ले गए थे। और उस वर्दी को देखकर ही पब में वो सभी लोग उनसे घबरा रहे थे।

खैर, टॉम ऑल्टर ने ड्राइवर को बताया कि मैं तो एक एक्टर हूं। मैं इंडिया से हूं और हम यहां एक इंडियन फिल्म की शूटिंग करने आए हैं। तब टैक्सी ड्राइवर ने टॉम साहब से कहा कि तभी आपको पता नहीं है कि आप किस जगह से आ रहे हैं।

उस टैक्सी ड्राइवर ने इन लोगों को बताया कि जिस पब में आप गए थे वो एक लोकल इटैलियन माफिया का पब है। वहां कोई पुलिस वाला नहीं जाता। आप पुलिस की वर्दी में वहां से खाना खाकर आ रहे हैं।

समझ लीजिए कि आप बच गए हैं। टैक्सी वाले की वो बात सुनकर टॉम ऑल्टर और उनके साथी बहुत हंसे। हालांकि उन्हें ये भी अहसास था कि अगर कोई बात इधर-उधर हो जाती तो आज मामला काफी गड़बड़ भी हो सकता था।

"नहीं नहीं नहीं, हम तो गाएंगे ही। तुम क्या करोगे?" किशोर दा ने अपने स्टाइल में अमरीश पुरी जी से कहा। इसके जवाब में अमरीश...
22/06/2026

"नहीं नहीं नहीं, हम तो गाएंगे ही। तुम क्या करोगे?" किशोर दा ने अपने स्टाइल में अमरीश पुरी जी से कहा। इसके जवाब में अमरीश पुरी जी बोले कि मैं कोई डायलॉग बोल दूंगा। साथियों ये एक छोटा सा लेकिन बड़ा ही रोचक किस्सा है।

ये घटनाक्रम लंदन में हुआ था। ये क्या किस्सा है, चलिए जानते हैं। आज अमरीश पुरी जी का जन्मदिवस है। 22 जून 1932 को अमरीश पुरी जी का जन्म हुआ था। तो चलिए आज अमरीश पुरी जी के बारे में कुछ रोचक बातें जानते हैं।

जब किशोर दा की मृत्यु हुई थी उससे कुछ महीने पहले वो एक शो करने लंदन गए थे। और उस वक्त अमरीश पुरी जी भी किशोर दा के साथ लंदन गए थे। लंदन में किशोर दा का कॉन्सर्ट था।

एक इंटरव्यू में अमरीश पुरी जी ने बताया था कि प्रोग्राम शुरू होने से पहले स्टेज के पीछे किशोर दा ने अमरीश पुरी जी से कहा,"हम क्या प्रोग्राम देंगे आज यहां? बताओ" अमरीश पुरी जी ने किशोर दा से कहा कि आप तो गाने का प्रोग्राम ही देंगे।

तो किशोर दा बोले,"नहीं नहीं नहीं, हम तो गाएंगे ही। तुम क्या करोगे?" तब अमरीश पुरी जी ने कहा कि मैं स्टेज पर कुछ बोलूंगा। कोई डायलॉग्स वगैरह। ये सुनकर किशोर दा बोले,"नहीं, तुम हमारे साथ गाओगे। तुम्हें गाना पड़ेगा।"

किशोर दा की ये बात सुनकर अमरीश पुरी जी बड़े हैरान हुए। उन्होंने कहा,"किशोर जी कहां आप और कहां मैं। आपके सामने गाने की मेरी हिम्मत नहीं है।" पुरी साहब की ये बात सुनकर किशोर दा उनसे बोले,"अरे जाओ जाओ। ऐसा क्यों बोलते हो? तुम्हें हमारे साथ गाना ही पड़ेगा।"

फिर किशोर दा अमरीश पुरी जी का हाथ पकड़कर उन्हें अपने साथ स्टेज पर ले गए। और वहां उन्होंने मिस्टर इंडिया फ़िल्म का एक गीत गाया। और अमरीश पुरी जी ने भी किशोर दा के साथ वो गीत गाया।

वो गीत कौन सा था, ये तो अपने उस इंटरव्यू में अमरीश पुरी जी ने नहीं बताया। मगर मैं अपनी तरफ़ से अंदाज़ा लगा रहा हूं कि शायद वो गीत होगा "ज़िंदगी की यही रीत है। हार के बाद ही जीत है।"

अगली बात जो पुरी साहब ने उस इंटरव्यू में बताई थी, वो जानते हैं। अमरीश पुरी जी जब छोटे थे तो वो सेना में जाना चाहते थे। जब अमरीश पुरी जी ने मैट्रिक पास की तो उन्होंने नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी का इम्तिहान दिया दिया था।

लेकिन सेना में जाना पुरी साहब के नसीब में ही नहीं था। इंटरव्यू का कॉल लैटर अमरीश पुरी जी को तब मिला जब इंटरव्यू हुए तीन दिन बीत चुके थे। और दोबारा वो उम्र सीमा पार करने की वजह से कोशिश ना कर सके।

अमरीश पुरी जी की पहली फ़िल्म थी शांतता कोर्ट चालू आहे। ये एक मराठी फ़िल्म थी। लेकिन अमरीश जी की पहली हिंदी फ़िल्म थी रेशमा और शेरा। इस फ़िल्म में अमरीश पुरी जी के किरदार का नाम था रहमत खां, जो एक चरित्र किरदार था।

रेशमा और शेरा फ़िल्म की शूटिंग राजस्थान के रेगिस्तानों में हुई थी। और पूरी टीम वहां टेंट में रहा करती थी। अमरीश पुरी जी बताते हैं कि वहां दूर-दूर तक कोई पेड़ नहीं दिखाई देता था। बस एक पेड़ था जिसके नीचे सभी लोग बैठा करते थे।

कई दफ़ा ऐसा होता था जब ऊंट के शरीर पर चिपककर खून पीने वाले बड़े-बड़े कीड़े पेड़ के नीचे बैठने वालों के पैरों में चिपककर खून पीने लगते थे। अमरीश पुरी जी के पैरों में भी वो कीड़े लगे थे। अमरीश जी ने बताया था कि तपती रेत और बेतहाशा गर्मी के बावजूद भी सभी कलाकारों व अन्य स्टाफ़ ने बहुत मेहनत से फ़िल्म का काम पूरा किया था।

वहीदा रहमान जी ने अपने दृश्यों को शूट करते वक्त ज़रा भी परेशानी नहीं जताई। ना ही किसी तरह के नखरे दिखाए। वो बहुत देर तक अपने सीन्स के लिए राजस्थान के रेगिस्तानों की चिलचिलाती धूप में खड़ी रहा करती थी।

22/06/2026

Early life of Amrish Puri ji

रा-वन फ़िल्म अगर अभी भी याद है तो उसका ये दृश्य भी आपने देखा होगा। एक इंटरव्यू में रा-वन के डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने बत...
22/06/2026

रा-वन फ़िल्म अगर अभी भी याद है तो उसका ये दृश्य भी आपने देखा होगा। एक इंटरव्यू में रा-वन के डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने बताया था कि उस सीक्वेंस की पूरी प्लानिंग होने के बाद उन्हें ये आईडिया आया था कि इसमें रजनी सर को इन्क्ल्यूड किया जा सकता है।

जब अनुभव सिन्हा व शाहरुख खान ने उस सीन के लिए रजनीकांत जी से बात की तो उन्हें पता चला कि रजनी सर की तबियत ठीक नहीं चल रही है। उस वक्त शाहरुख और अनुभव ने वो सीन ड्रॉप करने का फ़ैसला लिया। लेकिन रजनीकांत जी ने उनसे कहा कि वो ये सीन शूट करने ज़रूर आएंगे। वो आए भी।

रा-वन कमर्शियली बहुत ख़ास नहीं रही थी। बिलॉ एवरेज प्रदर्शन था इसका। चूंकि शाहरुख ने तगड़ी हाइप बना दी थी इस फ़िल्म की, तो कुछ लोग इसे देखने गए थे सिनेमाघरों में। मगर अधिकतर लोग निराश होकर आए थे। हालांकि शाहरुख के तगड़े वाले फैंस ज़रूर खुश थे ये फ़िल्म देखकर।

जब रजनीकांत सर की एंट्री होती है रा-वन में तो सिनेमा हॉल्स तालियों और सीटियों से गूंज उठे थे। अनुभव सिन्हा ने उस इंटरव्यू में ये भी बताया था कि उन्होंने रजनी सर को रोबोट फ़िल्म के चिट्टी के तौर पर रा-वन में फ़ीचर करने का प्लान नहीं किया था।

लेकिन जब रजनी सर व अनुभव सिन्हा और शाहरुख खान की मीटिंग हुई थी रजनीकांत जी के रा-वन के सीन के लिए तो उस मीटिंग में रजनी सर की बेटी सौंदर्या भी मौजूद थी। और सौंदर्या ने ये सलाह दी थी कि रा-वन में रजनीकांत जी के रोबोट फ़िल्म वाला कैरेक्टर दिखाया जाना चाहिए।

आज डायरेक्टर अनुभव सिन्हा का जन्मदिन है। 22 जून 1965 को अनुभव सिन्हा प्रयागराज में जन्मे थे। 2001 में आई तुम बिन अनुभव सिन्हा जी की पहली फ़िल्म थी।

उससे पहले अनुभव सिन्हा विज्ञापन फ़िल्में व म्यूज़िक वीडियोज़ डायरेक्ट कर चुके थे। अनुभव सिन्हा बहुत अच्छे लेखक भी हैं। और फ़िल्में प्रोड्यूस भी करते हैं। अनुभव सिन्हा जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

द हॉल थिंग इज़ दैट कि भइया सबसे बड़ा रुपैया। इस वक्त मुकेश खन्ना साहब को बड़ा ट्रोल किया जा रहा है। वजह? उन्होंने समय रै...
22/06/2026

द हॉल थिंग इज़ दैट कि भइया सबसे बड़ा रुपैया। इस वक्त मुकेश खन्ना साहब को बड़ा ट्रोल किया जा रहा है। वजह? उन्होंने समय रैना के साथ एक विज्ञापन में काम जो किया है। एक मोबाइल ब्रांड के विज्ञापन में। ये विज्ञापन सामने आने के बाद से ही लोग बड़े हैरान हो रहे हैं। इस विज्ञापन में मुकेश खन्ना और समय रैना साथ में दिख रहे हैं।

लोगों को ये बात हजम नहीं हो रही है कि मुकेश खन्ना समय रैना के साथ काम कैसे कर सकते हैं? क्योंकि कुछ महीने पहले तो वो ही पानी पी-पीकर समय रैना को कोस रहे थे। और अब वो समय रैना के साथ काम भी कर रहे हैं। क्या मुकेश खन्ना की भारतीय संस्कृति और सभ्यता पर कही जाने वाली वो सब बातें बस एक ढोंग थी?

लोग कह रहे हैं कि कहां तो मुकेश खन्ना समय रैना का मुंह काला करके उसे गधे पर बैठाकर शहर में घुमाने की बात कर रहे थे। और कहां अब रुपयों की खातिर समय के साथ स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। जबकी बीती शनिवार को ही समय रैना का शो इंडियाज़ गॉट लैटेंट दूसरे सीज़न के साथ आया है। जो अभी से ही चर्चाओं में भी आ गया है।

लोग मुकेश खन्ना को पैसों का लालची, पाखंडी और जाने क्या-क्या बोल रहे हैं। कैसी-कैसी तोहमतें लगा रहे हैं मुकेश खन्ना पर लोग। ये विज्ञापन समय रैना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया है। विज्ञापन में दिख रहा है कि समय रैना फोन पर किसी से बातें कर रहे हैं। तभी शक्तिमान के अंदाज़ में मुकेश खन्ना की एंट्री होती है वहां।

वैसे मुकेश खन्ना इस विज्ञापन में भी समय रैना का मुंह काला करने की बातें कर रहे हैं। समय पर हुई 3 FIR का ज़िक्र कर रहे हैं। समय का मुंह काला करने को भी बोल रहे हैं। मगर इस बार गुस्से में नहीं, मुकेश खन्ना साहब ये सब बातें मुस्कुराते हुए बोल रहे हैं। जैसे कि कोई लड़की पहले किसी लड़के पर फुल भड़की हुई हो। फिर उसकी किसी बात से इम्प्रैस हो गई हो।

ये वीडियो देखकर लोग भड़के हुए हैं। कोई मुकेश खन्ना को फेम का भूखा कह रहा है। कोई कह रहा है कि मोरैलिटी की तो लग गई। किसी ने कहा कि पैसा ही सबकुछ है। एक ने तो लिख दिया कि शक्तिमान भी बिक गया। एक ने समय रैना की तारीफ़ में लिखा कि ये बंदा अपने दुश्मनों को पैसा कमाने वाली मशीन में बदल देता है। एक ने फिर मुकेश खन्ना को टार्गेट करते हुए लिखा,"पैसों के लिए और कितना गिरोगे शक्तिमान?"

तो मित्रों। कुछ लोग कहते हैं कि हर चीज़ की एक कीमत होती है। अगर सही कीमत लगे तो कोई भी चीज़ बिक जाती है। मैं हालांकि इस बात से सहमत नहीं हूं। मगर ये ज़रूर है कि बहुत सी ऐसी चीज़ें हैं जो लगती तो ऐसी हैं जैसे अमोल हैं। बिक नहीं सकती। मगर एक वक्त पर वो भी आराम से बिक जाती हैं।

तो अब से कभी आप सोशल मीडिया पर दो लोगों को लड़ते-झगड़ते देखें तो उसे सीरियसली मत लीजिएगा। किसी स्क्रिप्टेड शो की तरह देखिएगा उसे। जैसे कि बिग बॉस होता है। लेकिन पंगा तो ये है कि हमारे लोग तो बिग बॉस को भी ऐसे देखते हैं जैसे वो दुनिया का सबसे सच्चा शो है। क्या उम्मीद करें अपने लोगों से भाई। 🤣😁🙏

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