22/06/2026
"क्या होता है ये वेज बर्गर?" उस अमेरिकी महिला ने बड़ी हैरानी से टॉम ऑल्टर से पूछा। टॉम ऑल्टर को आभास हो गया कि इस अमेरिकन महिला को वेज बर्गर शब्द सुनकर इतनी हैरानी क्यों हो रही है।
टॉम साहब ने उस अमेरिकी महिला को एक्सप्लेन किया कि वो क्या मांग रहे हैं और क्यों मांग रहे हैं। उस महिला ने टॉम साहब का ऑर्डर तो ले लिया। लेकिन उसका दिमाग भन्नाया हुआ था कि ये वेज बर्गर क्या बला है? उस दौर में वेज बर्गर जैसी किसी चीज़ का कभी नाम अमेरिकियों ने सुना ही नहीं था।
साथियों आज टॉम साहब का जन्मदिन है। टॉम ऑल्टर साहब का। 22 जून 1950 को टॉम ऑल्टर जी का जन्म हुआ था। और आज जो टॉम साहब का किस्सा आप किस्सा टीवी पर पढ़ने जा रहे हैं, वो पढ़ते हुए आपको लगेगा जैसे किसी हॉलीवुड फ़िल्म की कहानी आप पढ़ रहे हों। मैं ये कहानी पहले भी क़िस्सा टीवी पर शेयर कर चुका हूं।
आज टॉम साहब के जन्मदिन के मौके पर फ़िर से शेयर कर रहा हूं। ताकि क़िस्सा टीवी के साथ जुड़े नए लोग भी इस कहानी से रूबरू हो सकें। इस किस्से में क्रिकेट भी शामिल है। और क्रिकेट वाले किस्से का ज़िक्र तो मिथुन दा की बायोग्राफ़ी में भी मिलता है।
वैसे मैं ये किस्सा टॉम साहब के पुत्र जेमी ऑल्टर जी की एक यूट्यूब वीडियो के हवाले से लिख रहा हूं। जेमी जी का आभार। शुरू करते हैं ये बहुत शानदार किस्सा। पसंद आए तो लाइक-शेयर कर दीजिएगा।
ये किस्सा मिथुन दा की फिल्म रुख़्सत की शूटिंग के दौरान की। रुख़्सत रिलीज़ भले ही 1988 में हुई हो। लेकिन इस फिल्म की शूटिंग काफी पहले से चल रही थी। 1983 में जब कपिल देव जी के नेतृत्व वाली टीम इंडिया ने वेस्ट इंडीज़ को हराकर पहला क्रिकेट विश्वकप भारत को दिलाया था तब भी इस फिल्म की शूटिंग चल रही थी। वो भी अमेरिका में।
इस फिल्म की अधिकतर शूटिंग अमेरिका में ही हुई थी। रुख़्सत सिमी गरेवाल की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म थी। 1983 का वर्ल्ड कप खत्म होने के बाद भारतीय टीम अमेरिका के दौरे पर गई थी। वहां उसे कुछ एग्ज़ीबिशन मैचेस खेलने थे। उसी दौरान अमेरिका के रोड आइलैंड में रुख़्सत फिल्म की शूटिंग भी चल रही थी।
चूंकि रोड आइलैंड में भारतवंशियों की भी अच्छी-खासी तादाद है तो वहां भारतवंशियों के लिए अलग से एक अखबार भी निकलता था। रुख़्सत में टॉम ऑल्टर साहब ने भी एक अमेरिकी पुलिस अफसर का किरदार निभाया था। टॉम ऑल्टर जी ने ही उस अखबार में टीम इंडिया के एग्ज़ीबिशन मैच का एक विज्ञापन देखा। और टॉम ऑल्टर साहब तो थे ही क्रिकेट के बड़े वाले शौकीन।
टीम इंडिया का वो मैच न्यूजर्सी में था जो कि रोड आइलैंड के पास ही मौजूद है। टॉम ऑल्टर जी ने मिथुन दा से बताया कि भारतीय टीम अमेरिका में मैच खेलने आई है। और अगला मैच जहां होगा वो जगह पास में ही मौजूद है। ये सुनकर मिथुन दा बड़े एक्साइट हुए। फिर टॉम ऑल्टर व मिथुन दा फिल्म के प्रोड्यूसर के पास गए और उन्होंने रिक्वेस्ट की, कि हमें मैच देखने के लिए एक ब्रेक दिया जाए।
इत्तेफाक से जिस दिन मैच था उस दिन शूटिंग नहीं होनी थी। सो मिथुन दा व टॉम ऑल्टर जी को मैच देखने जाने की परमिशन मिल गई। मिथुन दा ने तीन टिकट खरीदे। अपने लिए, टॉम ऑल्टर जी के लिए व अपने मेकअप मैन के लिए भी। तीनों उसी शाम मैच देखने न्यूजर्सी निकल गए।
अमेरिका के उस दौरे पर 1983 वर्ल्ड कप की पूरी भारतीय टीम थी। सिवाय कपिल देव और के.श्रीकांत जी को छोड़कर। वहीं अमेरिका की टीम में वेस्ट इंडीज़ के तब के दिग्गज खिलाड़ी एलविन कालीचरण शामिल थे। मिथुन दा व टॉम ऑल्टर साहब जब शाम को न्यूजर्सी पहुंचे, तो वो सीधे सुनील गावस्कर से मिलने पहुंच गए।
गावस्कर साहब से इनकी मुलाकात हुई और काफी बातें भी हुई। बातचीत के दौरान गावस्कर साहब ने कुछ ऐसा कहा जिसे सुनकर मिथुन दा और टॉम ऑल्टर साहब अपने कानों पर यकीन ना कर सके। गावस्कर ने कहा कि अगर टॉम ऑल्टर व मिथुन चाहें तो वो दोनों भारत की तरफ से इस मैच में खेल सकते हैं।
ये बहुत बड़ी बात थी। और इन दोनों के लिए एक बहुत अच्छा मौका भी। इसलिए दोनों ने गावस्कर साहब से कहा कि वो ज़रूर खेलेंगे। अगली सुबह मैच शुरू हुआ। कप्तान सुनील गावस्कर ने टॉस जीतकर फील्डिंग करने का फैसला लिया। और जानते हैं ऑपनिंग ओवर उन्होंने किससे कराया? अपने मिथुन दा से।
मिथुन जब मैदान पर उतरे तो उन्हें देखकर दर्शक तालियां और सीटियां बजाने लगे। खासतौर पर भारतीय मूल के दर्शक। आयोजकों ने मिथुन दा की फिल्म डिस्को डांसर के गाने बजाने शुरू कर दिए। सोचिए क्या नज़ारा रहा होगा उस दिन।
खैर, कुछ ओवर्स के बाद गावस्कर साहब ने टॉम ऑल्टर जी को बॉल थमा दी। यानि अब टॉम ऑल्टर साहब को बॉलिंग करनी थी। वो लम्हा टॉम ऑल्टर साहब के लिए बड़ा भावुक करने वाला लम्हा था।
क्योंकि एक वक्त था जब वो ख्वाब देखते थे कि एक दिन वो भी टीम इंडिया के लिए क्रिकेट खेलेंगे। बहरहाल, टॉम ऑल्टर साहब ने बॉलिंग शुरू की। और उस ओवर में उन्होंने USA टीम के कैप्टन को LBW आउट कर दिया।
उस विकेट के बाद टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने टॉम ऑल्टर जी को गले लगा लिया। बकौल टॉम ऑल्टर, समय जैसे थम सा गया था तब। उन्हें लगा जैसे वो अपने सपने को जी रहे हैं।
मैदान तालियों के शोर से गूंज रहा था। और टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर रखा था। वो उन्हें बधाई दे रहे थे। तारीफ कर रहे थे। बहुत स्पेशल दिन था वो टॉम ऑल्टर साहब के लिए।
ब एक और किस्सा भी जान लेते हैं। ये किस्सा भी बड़ा ही रोचक है। जैसा कि ऊपर मैंने बताया था कि टॉम ऑल्टर जी इस फिल्म में अमेरिकन पुलिस अफसर बने थे तो ये कहानी उसी रोल से जुड़ी है।
फिल्म की कहानी के मुताबिक टॉम ऑल्टर का किरदार है तो अमेरिकन पुलिस के अफसर। लेकिन चूंकि वो सालों से इंडियन कस्टम डिपार्टमेंट से जुड़ा था तो उसे हिंदी बहुत अच्छी तरह से बोलनी-समझनी आती है। फिल्म में टॉम ऑल्टर जी के जितने भी दृश्य हैं वो सब अमेरिकन पुलिस की वर्दी में हैं।
एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि फिल्म की शूटिंग के बाद क्य्रू के कुछ मेंबर्स को भूख लगी। उस वक्त तक यूनिट के लिए बनाया जाने वाला खाना खत्म हो चुका था। यानि अब खाने के लिए बाहर ही जाना पड़ता। मसला ये था कि जिन क्र्यू मेंबर्स को भूख लगी थी वो वेजेटेरियन थे। और अमेरिका में रात के वक्त किसी जगह वेज खाना ढूंढना एक चुनौतीपूर्ण काम था।
टॉम ऑल्टर साहब को जब पता चला कि कुछ लोगों को भूख लगी है तो वो उन्हें खाना खिलाने चल दिए। उन्होंने एक टैक्सी ली और रोड आइलैंड की सड़कों पर देर रात रेस्टोरेंट की तलाश में निकल पड़े। टैक्सी वाले ने उन सभी को एक पब के बाहर उतार दिया और कहा कि इस वक्त तो आपको यहीं पर कुछ खाने के लिए मिल सकता है।
टॉम ऑल्टर व बाकि सब उस पब में चले गए। टॉम ऑल्टर उस पब के काउंटर पर गए और उन्होंने पूछा कि खाने में क्या मिलेगा? काउंटर पर एक महिला थी। उसने शक व घबराई हुई नज़रों से टॉम ऑल्टर साहब की तरफ देखा और कुछ सेकेंड्स में जवाब दिया। वो बोली,"इस समय तो बर्गर्स ही मिल सकेंगे।"
टॉम ऑल्टर ने उससे कहा कि एक हैम बर्गर लाइए और तीन वेज बर्गर्स। वो महिला थोड़ी कन्फ्यूज़ हुई। उसने टॉम साहब से पूछा,"ये वेज बर्गर क्या होता है?" टॉम ऑल्टर साहब समझ गए कि उस महिला की दुविधा क्या है। दरअसल, अमेरिका के लोग वेज बर्गर जैसी चीज़ को जानते ही नहीं थे तब। इसिलिए वो महिला कन्फ्यूज़ हो रही थी।
टॉम साहब ने उससे कहा कि अगर आपके पास कोई बिना मांस वाली पैटी है तो बर्गर में उसे लगा दीजिए। अगर नहीं है तो बर्गर के बीच में बस कुछ पत्ते, खीरा और टमाटर रख दें।
उस महिला की हैरत खत्म तो नहीं हुई। लेकिन उसने टॉम साहब का ऑर्डर ले लिया। ऑर्डर आता उससे पहले टॉम साहब ने नोटिस किया कि पब के अंधेरे कोने में चार-पांच आदमी बैठे हैं। और वो आदमी भी उन्हें शक व घबराई नज़रों से देख रहे हैं।
टॉम साहब को समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा हो क्यों रहा है? क्यों वो महिला और वो सब आदमी उन्हें ऐसे शक की नज़रों से घूर रहे हैं? क्यों घबरा रहे हैं? थोड़ी देर बाद टॉम साहब का ऑर्डर आ गया। इन सभी ने जल्दी से अपना खाना फिनिश किया और फिर वहां से निकल लिए।
बाहर आकर उन्होंने अपने होटल के लिए एक टैक्सी ली और वहां से चल दिए। कुछ देर बाद टैक्सी ड्राइवर ने टॉम ऑल्टर साहब से पूछा कि क्या आप सच में पुलिस अफसर हो? बस, उसी वक्त टॉम ऑल्टर को समझ में आ गया कि उस पब के काउंटर वाली वो महिला व वो चार-पांच आदमी उन्हें देखकर क्यों घबरा रहे थे।
दरअसल, शूटिंग के बाद टॉम ऑल्टर ने अपनी कॉस्ट्यूम चेंज ही नहीं की थी। वो उन क्यू मेंबर्स को अपनी शूटिंग वाली अमेरिकन पुलिस की वर्दी में ही ले गए थे। और उस वर्दी को देखकर ही पब में वो सभी लोग उनसे घबरा रहे थे।
खैर, टॉम ऑल्टर ने ड्राइवर को बताया कि मैं तो एक एक्टर हूं। मैं इंडिया से हूं और हम यहां एक इंडियन फिल्म की शूटिंग करने आए हैं। तब टैक्सी ड्राइवर ने टॉम साहब से कहा कि तभी आपको पता नहीं है कि आप किस जगह से आ रहे हैं।
उस टैक्सी ड्राइवर ने इन लोगों को बताया कि जिस पब में आप गए थे वो एक लोकल इटैलियन माफिया का पब है। वहां कोई पुलिस वाला नहीं जाता। आप पुलिस की वर्दी में वहां से खाना खाकर आ रहे हैं।
समझ लीजिए कि आप बच गए हैं। टैक्सी वाले की वो बात सुनकर टॉम ऑल्टर और उनके साथी बहुत हंसे। हालांकि उन्हें ये भी अहसास था कि अगर कोई बात इधर-उधर हो जाती तो आज मामला काफी गड़बड़ भी हो सकता था।