05/08/2026
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फुलैगौ सो झरैगौ, चढ़ेगौ सो गिरैगौ" ब्रजभाषा या ग्रामीण हिंदी क्षेत्र की एक बेहद प्रसिद्ध और गहरी कहावत है।
अर्थ- "जो फूल खिला है, वह एक न एक दिन मुरझाकर गिरेगा ही और जो ऊपर चढ़ा है, उसका नीचे गिरना भी तय है।
"यह कहावत हमें जीवन के सबसे बड़े कड़वे सच से परिचय कराती है।
1. हर उन्नति का अंत पतन है- दुनिया का यह नियम है कि जो चीज़ आज बहुत ऊंचाई या तरक्की पर है, कल उसका नीचे आना तय है। इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े राजा, महाराजा और साम्राज्य जो कभी अर्श (ऊंचाई) पर थे, वक्त के साथ फर्श (ज़मीन) पर आ गए।
2. घमंड न करने की सीख- यह कहावत इंसान को चेतावनी देती है कि अपनी ताकत, जवानी, पैसे या ऊंचे पद पर कभी घमंड (अहंकार) नहीं करना चाहिए। आज अगर आपके पास सत्ता या कामयाबी का 'फूल' खिला है, तो वह हमेशा वैसा नहीं रहेगा, वक्त बदलते ही वह मुरझा जाएगा।
3. जीवन की नश्वरता (परिवर्तनशीलता)संसार में कोई भी स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती। दुख के बाद सुख और सुख के बाद दुख का आना तय है। प्रकृति का नियम ही बदलाव है ।नया पत्ता आता है, फूल खिलता है, फल बनता है और फिर सब कुछ मिट्टी में मिल जाता है।संक्षेप में कहें तो: यह पंक्ति इंसान को ज़मीन से जुड़े रहने और हर परिस्थिति में सामान्य रहने की सीख देती है, क्योंकि वक्त हमेशा बदलता रहता है।