Social news a to z Lakhan Kumar

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Social news a to z Lakhan Kumar मनुवाद को जड़ समाप्त करना मेरे जीवन का प्रथम लक्ष्य है।

17/07/2020

जिस प्रकार से देश के पूरे ब्राह्मण पुजारी तथा पुरोहित आएसएस और बीजेपी के लिए काम करता हैं। ठीक उसी प्रकार हमारे देश के पूरे भंते और बौद्धाचार्य वामसेफ तथा बहुजन समाज पार्टी के लिए काम करते तो आज पूरा भारत बौद्धमय हो गया होता।
✍️ लखन कुमार बहुजन

01/07/2020

अब पता चला मोदी जी कितने बहादुर है,
20 शहीदो का बदला 59 App बैन करके लिया है..
इसे कहते हैं 56 इंच का सीना.....
चीनी एप्स डिलिट करने वाले बनावटी देशभक्तों तुममें से कितने लोगों ने चाईनीज मोबाईल को तोड़ा है सच - सच बताना तुम्हारे फेकू की कसम।
✍️ लखन कुमार बहुजन

30/06/2020

मनु राक्षस की मुर्ति राजस्थान मे काफी सालो से खड़ी है लेकिन कांग्रेस की सरकार मुर्ति को हटाने के पक्ष मे नहीं हैं क्योंकि कांग्रेस की विचारधारा भी मनु स्मृति से ही चलती है जिस मनुस्मृति ने महिलाओ और दलित को कभी सम्मान नहीं दिया...
उसी मनु के दो औलाद हुए कांग्रेस और बीजेपी मनु को खत्म करने के लिए उनके दोनों औलादों को खत्म करना होगा।
✍️ लखन कुमार बहुजन

देश में जब छुआ-छूत का प्रभाव जोर-शोर से सारे देश में फैला हुआ था, उस समय एक ऐसे महाज्ञानी का जन्म हुआ जो देश ही नहीं, बल...
14/05/2020

देश में जब छुआ-छूत का प्रभाव जोर-शोर से सारे देश में फैला हुआ था, उस समय एक ऐसे महाज्ञानी का जन्म हुआ जो देश ही नहीं, बल्कि विदेशों को एक नई दिशा दी, जिस पर देश तो नहीं, परन्तु, विदेश उस दिशा पर नितंर चलते हुए राष्ट्र का निर्माण कर रहे हैं. डॉ.बाबासाहब अम्बेडकर राजनीतिक विशेषज्ञ, कुशल नेता, वकील, भारतीय विधिवेत्ता, भारतीय संविधान के निर्माणकर्ता और एक महान विचारवादी क्रांतिकारी थे. जिन्होंने विचार क्रांति से मूलनिवासी बहुजन समाज को हर तरह के अधिकार देकर उनको ब्राह्मणवाद के दलदल से निकालने का काम किया.
डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर ने अपना सारा जीवन ब्राह्मणवादी व्यवस्था में गुलाम बनाकर रखे गये 85 प्रतिशत मूलनिवासी बहुजन समाज को आजाद कराने में बिता दिया. क्योंकि, ब्राह्मणों ने मूलनिवासी बहुजन समाज को ‘‘रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा’’ आदि सभी मानवीय अधिकार छीनकर उन्हें न केवल जानवर से बद्तर जीवन जीने के लिए मजबूर किया. बल्कि उनके ऊपर अन्याय और अत्याचार की सभी हदें भी पार कर चुके थे. कई सामाजिक और वित्तीय बाधाएं पार कर डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने कॉलेज की शिक्षा प्राप्त की. कानून की उपाधि प्राप्त करने के साथ ही विधि, अर्थशास्त्र व राजनीति विज्ञान में अपने अध्ययन और अनुसंधान के कारण कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से कई डॉक्टरेट डिग्रियां भी अर्जित कीं.

क्रान्तिकारी जय भीम   अगर हम हिन्दु हैं तो तिवारी,दुबे,मिश्रा,सिंह,पटेल,गुप्ता , कुशवाहा,मौर्या,राम,निषाद लिखने की क्या ...
19/04/2020

क्रान्तिकारी जय भीम
अगर हम हिन्दु हैं तो तिवारी,दुबे,मिश्रा,सिंह,पटेल,गुप्ता , कुशवाहा,मौर्या,राम,निषाद लिखने की क्या जरुरत है...
सब का टाईटल हटा कर केवल हिन्दु कर दो और सब का आपस में रोटी बेटी का संम्बन्ध स्थापित करो
केवल शुद्र में 6743 जातियां क्यों है...
चुनाव के समय,हिन्दु मुसलमान के बीच लड़ाई के समय हम हिन्दु और बाकि समय हरे चमरा,हरे दुसधा,हरे अहिरा,हरे कोईरिया क्यों...?
#अपने_आपको_पहचानिए
1. संविधान के अनुच्छेद-340 के अनुसार समस्त ओबीसी हिन्दू नहीं हैं।
2. संविधान के अनुच्छेद- 341 के अनुसार समस्त एससी हिन्दू नहीं हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद-342 के अनुसार समस्त एसटी हिन्दू नहीं हैं।
4. तो फिर ओबीसी, एससी और एसटी क्या हैं?
उत्तर :- ये इस भारत देश के मूलनिवासी हैं।
5. फिर हिन्दू हैं कौन?
सवर्ण भी अपने को हिन्दू नहीं मानते आखिर क्यों?
क्योंकि वर्तमान में जो सवर्ण हैं उन्होंने ने विदेशी आक्रांताओं, मुस्लिमों, मुगलों आदि से रोटी-बेटी का रिश्ता कायम किया है।
उन्होंने मुगलों को जजिया कर नहीं दिया था:- क्योंकि वे भी यूरेशियाई विदेशी है, ये मैं नहीं भारत की सेलुलर एन्ड मॉलिक्युलर बायोलॉजी की प्रयोगशाला हैदराबाद कह रही है।
6. फिर हिन्दू है क्या:- हिन्दू फारसी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ गुलाम, चोर, धोखेबाज, काला कलूटा होता है।
ये मैं नहीं गूगल पर 'हिन्दू' शब्द सर्च करके उसका अर्थ ढूँढिये। ईरान, इराक, अफगानिस्तान, अरब, यूरोप, अमेरिका आदि देशों के निवासी भारत में रहने वाले सभी नागरिकों/मूलनिवासियों को हिन्दू कहते हैं चाहे वह मुस्लिम या सिक्ख या जैन आदि ही क्यों न हो।
'हिन्दू' शब्द सबसे पहले लिखित तौर गीता प्रेस गोरखपुर, हिन्दू महासभा आदि ने 1923 में प्रयोग किया है। किसलिये :- ओबीसी, एससी, एसटी को लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने के लिए।
7. आप (ओबीसी, एससी और एसटी) संविधान के अनुसार हिन्दू नहीं हैं। तो फिर किस मुँह से आप कह रहे हैं कि गर्व से कहो कि हम हिन्दू हैं।
8. ओबोसी, एससी और एसटी द्वारा स्वयं को हिन्दू कहने से किसको लाभ हो रहा है और किसको हानि?
1947 से 2019 तक 72 वर्षों में ओबीसी जिसकी आबादी 52% है उसकी आनुपातिक भागीदारी मीडिया, शिक्षा और उच्च शिक्षा से लगभग शून्य हो गयी। कार्यपालिका में उच्चपदों पर केवल 1% सहित अन्य पदों पर केवल 4% रह गयी। विधायिका में ओबोसी के लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय केवल अपना परिवार पाल रहे हैं और दलाली कर रहे हैं।
एससी और एसटी की आबादी 25% होने पर भी कुल मिलाकर उन्हें कार्यपालिका, न्यायपालिका, मीडिया आदि में 10% भी प्रतिनिधित्व उन्हें नहीं मिल पाया है।
9. निष्कर्ष ये है कि इन 72 वर्षों में 77% मूलनिवासी (ओबीसी, ऐसी और एसटी) लोकतन्त्र के चारों संस्थाओं से या तो बाहर हो चुके हैं या ये लोग अपने समाज के लोगों के लिये नकारा साबित हो चुके हैं।
#उदाहरण: संविधान विरुद्ध होने पर भी क्या कोई मूलनिवासी सांसद या विधायक क्रीमीलेयर के विरोध में खड़ा हुआ है?
एक तरह से 50.5% पद सवर्णों के लिए आरक्षित किये जा चुके हैं। संविधान विरुद्ध होने पर भी क्या कोई मूलनिवासी सांसद या विधायक इसका विरोध कर रहा है?
आर्थिक आधार जनरल कैटेगरी को 10% आरक्षण संविधान विरुद्ध है, कोई मूलनिवासी सांसद या विधायक क्या इसका विरोध कर रहा है?
10. अतः जब तक 77% मूलनिवासी अपने को हिन्दू कहे जाने का एक साथ विरोध नहीं करेंगे तब तक उनके विरुद्ध सामाजिक, आर्थिक, शारीरिक, धार्मिक, शैक्षणिक अपराध और अनैतिक कार्य होते रहेंगे।
क्योंकि उनके संवैधानिक अधिकारों का रखवाला कोई नहीं है और जो वहाँ हैं भी वे केवल अपना या अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं उनको बहुजनों (ओबोसी, एससी और एसटी) से कोई सरोकार नहीं रह गया है।
कुछ लोग आपके अधिकारों के रक्षक होने का नाटक कर रहे हैं, उनसे भी होशियार हों जाने की ज़रूरत हैं।
गर्व से कहो कि हम भारत के मूलनिवासी हैं।

क्रान्तिकारी जय भीम     #नारी_शिक्षा_से_काँपता_धर्म।   एक महिला कभी मन्दिर की मुख्य पुजारी नहीं बन सकती,       एक महिला ...
21/02/2020

क्रान्तिकारी जय भीम
#नारी_शिक्षा_से_काँपता_धर्म।

एक महिला कभी मन्दिर की मुख्य पुजारी नहीं बन सकती,
एक महिला कभी चर्च की पादरी नहीं बन सकती,
एक महिला कभी मस्जिद की मौलाना नहीं बन सकती।

आजतक किसी भी धर्म की कोई महिला विश्व विख्यात धर्मगुरु नहीं बन सकी लेकिन एक महिला, सासंद, मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, कुशल प्रशासक, अधिकारी सब कुछ बन गई यह ताकत धर्म की नहीं बल्कि शिक्षा और संविधान की है।
इसलिए नारी शिक्षा से कांपता है धर्म।

पहले 9 साल की उम्र में शादी का धार्मिक-शास्त्रीय प्रावधान ही इसलिए रखा गया, ताकि स्त्री पढ़ ना सके। जब शिक्षित नहीं होगी तो कहावत है शिक्षा के बिना नर पशु के समान होता है।
एक तरफ पुरुष के लिए 25 वर्ष ब्रह्मचर्य आश्रम तो स्त्री के लिए नादान उम्र में पति-परमेश्वर। ये स्त्रियों के लिए सनातन, पुरातन धर्म व्यवस्था ठगी नही तो क्या है?
कोई उसे 'ताड़न का अधिकारी' बता रहा है तो कोई 'एकांत का दुरुपयोग करने वाली। सारे व्रत, सारे गुनाह, सारे एहतियात स्त्री को लिखने का मकसद आखिर क्या रहा होगा ?

सती प्रथा, जौहर, कन्या वध, दहेज, देवदासी, वैधव्य प्रताड़ना, पर्दा प्रथा, हिजाब, नकाब, सब नारी को ही क्यों?
क्या माँ, बहन, बेटी, पत्नी के प्रति इतना क्रूर है हमारा समाज?
किसने बनाया उन्हें इतना नियमबद्ध क्रूर?
सनातन, पुरातन, सभ्यता, संस्कृति अथवा मनुवादी विचारधारा का आधार क्या यही क्रूरताएँ हैं?
जब जब नारी ने पढ़ने की सोची, सनातन पाखण्डियों के पसीने क्यो आये?
क्योंकि धर्म डरता है शिक्षा से। उसे ज्ञान देवी बनाया ही इसलिए गया है ताकी वह तर्क न कर सके। जहाँ तर्क है, वहां धर्म को आस्था के पीछे छुपना पड़ता है। गौरी लंकेश से इतना डरा सनातन धर्म कि उनकी हत्या ही करा डाली। पुरुष लिखते हैं धर्म को कम खतरा था, मगर स्त्री होकर लिखे यह तो क्रांति का आगाज़ है, धर्म का काल है भई।

अगर स्त्री ने धर्म के स्वार्थपूर्ण नियमों को समझ लिया तो कौन ढोएगा इस पाखण्ड को?
कलश यात्रा, जागरण, व्रत कथा, सत्संग, कथाएं, रिवाज, दक्षिणा, जिद, सस्वर नृत्य, आभूषण, बन्धन, रिश्ते, समागम, पवित्रता, सात जन्म, वचन सब बोझ पुरुष के बस का थोड़े ही है?
अभी हाल ही में जेएनयू में चंद लड़कियों ने आजादी क्या माँगी धर्म से लेकर राष्ट्रवाद तक को लपेट लिया 'पाखण्डियों' ने। बीएचयू, जामिया, देश के अलग हिस्सों में हमारी बच्चियों के साथ पुलिसिया क्रूरता और तमाम घटनाओं का आधार यही धार्मिक सोच है। यह घटना राज्य सरकार की बागडौर संभाले बैठे धार्मिक मुखौटे की मंशा ज़ाहिर करती है।

कोई आम आदमी मुख्यमंत्री होता तो शायद उसे धार्मिक समझ कम होती लेकिन यहां तो ऋषि, मुनि, संत परम्परा के शिरोमणि विराजमान हैं। ये ''धर्म की नगरी'' में नही होगा तो कहां होगा?
क्योंकि इन्ही नगरियों में विधवाओं को 'सभी मानवीय हकों' से वंचित रखकर उनके 'बीमार पति-परमेश्वर की मृत्यु या आत्महत्या' का दंड देने की बहुत पुरानी परंपरा रही है। यहां नारी को जिस्म के रूप में देखने के आदी 'वहशी' के लिए सब नारियाँ एक उपभोग की चीज-वस्तु मात्र हैं।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में जो घटित हुआ, जेएनयू में जो हंगामा हुआ यह नया नही है। इन्ही पाखंडी ठगों के पूर्वजों ने पुणे में सावित्री बाई फूले के साथ भी तो यही किया था।
उनके कपड़ों पर गोबर, कीचड़ डालने की बात तो सबने सुन रखी है लेकिन क्या आप जानते हैं इन सनातनियों ने बालिका शिक्षा को बंद करने की दूसरी नीच साजिश कौनसी की ?
1848 में भीड़ेवाड़ा बुधवार पेठ पुणे में जिस पहली बालिका स्कूल की स्थापना की गयी थी उस स्कूल के आजू-बाजू बुधवार पेठ में आज भारत की दूसरी सबसे बड़ी 'जिस्म की मंडी' कैसे बना दिया गया?

रेड-लाइट एरिया बसाने वाले लोग किस जाति वर्ग के होते हैं ?
धर्म की दुहाई देने वाले, धर्म के होलसेलर, डीलर और ठेकेदार कौन लोग हैं?
ये हम आसानी से समझ सकते हैं। कैसे बहुत ही नीचता से स्त्री-शिक्षा के पहले पौधे के आसपास तेज़ाब बिखेरा गया ताकि भविष्य में धर्म के खिलाफ किसी क्रांति का आधार ही न बन पाए। आज भी जब किसी लड़की द्वारा घर पर खुद से छेड़छाड़ की बात कही जाती है अधिकतर परिवार उसको घर मे कैद करने का उपचार करते हैं।
रेप विक्टिम को उसके कपड़े, रहन सहन और बेखौफ हँसी के लिए कोसा जाता है।
आखिर क्या गुनाह हुआ उस से समाज का सृजनहारी बनने की क्षमता पाकर ?

काश ! हर औरत इस धार्मिक साजिश को समझ पाती। मैं फिर दोहराऊंगी, संविधान नही होता तो नारी का अस्तित्व सिर्फ और सिर्फ 'भोग-विलास की वस्तु' होने तक ही सिमट जाता।
पौराणिक भागवत कथाओं, आसमानी बातों की बजाय संविधान से प्राप्त 'नारी अधिकार की धाराओं' के प्रचार कीजिये ताकि कोई भी रिश्ता उस से कुछ भी धार्मिक प्रपंच के नाम पर लूट ना पाए लेकिन नारी जब तक इतनी समझ विकसित कर सके तब तक उसे शिंकजे में कसा जा चुका होता है। उसे अपने ही घर में ऐसे जकड़ा जाता है कि वह बोलना तो दूर सोचना भी गुनाह समझने लगती है।

नारी को धर्म-ग्रंथ नही आईपीसी की धाराएं पढ़ाइये अपनी बेटियों को, व्रत नही भरपेट खिलाइए अपनी बेटियों को, दहेज नही अच्छी शिक्षा पर खर्चे, जूडो कराटे सिखाइये अपनी बेटियों को और अगर उसके साथ कोई भी अनहोनी होती है तो उसे अहसास दीजिये कि पापा पति या भाई उसे समाज द्वारा स्त्री होने की परम्परागत सजा नही थोपने देंगे।
भारत की नारी को केवल धर्म, कर्म और शर्म की सीमाओं से बाहर नहीं निकालना होगा बल्कि पुरुष प्रधानता वाली सोच पर खुद महिलाओं को भी विमर्श करना होगा। एक नारी को दूसरी नारी के खिलाफ खड़ा करना भी पुरुष प्रधानता वाली ही सोच है। धर्म नहीं संविधान को वरीयता दीजिए बदलाव अवश्य आएगा।

क्रान्तिकारी जय भीम   बाबा साहब ने कहा था मिशन का काम करना फांसी के फंदे पर चढ़ने से भी ज्यादा कठिन काम है। क्योंकि, फां...
21/02/2020

क्रान्तिकारी जय भीम
बाबा साहब ने कहा था मिशन का काम करना फांसी के फंदे पर चढ़ने से भी ज्यादा कठिन काम है। क्योंकि, फांसी के फंदे पर चढ़ने से व्यक्ति एक बार ही मर जाता है।
किंतु मिशन का काम करने वाला रोज मरता है।उसकी रातो की निंद व दिन का चैन छिन जाता है।
उसे कही अपमान तो कही सम्मान,कही गाली तो कही मिठाई, कही भोजन तो कही उपवास, इन सबको जो सह कर आगे बढ़ता है वही मिशनरी कहलाता है !
इंसान जीता है , पैसे कमाता है, खाना खाता है और अंत में मर जाता है! जीता इसलिए है ताकि कमा सके. कमाता इसलिए है ताकि खा सके और खाता इसलिए है ताकि जिंदा रह सके लेकिन फिर भी मर जाता है ..........अगर सिर्फ मरने के डर से खाते हो तो,
अभी मर जाओ, मामला खत्म, मेहनत बच जाएगी. मरना तो सबको एक दिन है ही,नही तो, समाज के लिए जीयो, जिंदगी का एक उद्देश्य बनाओ. गुलामी की जंजीर में जकड़े समाज को आजाद कराओ. अपना और अपने बच्चो का भरण पोषण तो एक जानवर भी कर लेता है |
मेरी नजर में इंसान वही है, जो समाज की भी चिंता करे और समाज के लिए कार्य भी करे, नही तो डूब मरे बेशक , अगर जिंदगी सिर्फ खुद के लिए ही जी रहे हो तो. "

क्रान्तिकारी जय भीम   कल मेरे एक पोस्ट पर एक बुद्धिमान भाई ने कमेंट किया था कि"  आप ये सब लिखते हो तो तुम्हें क्या फायदा...
21/02/2020

क्रान्तिकारी जय भीम
कल मेरे एक पोस्ट पर एक बुद्धिमान भाई ने कमेंट किया था कि" आप ये सब लिखते हो तो तुम्हें क्या फायदा है,, तो मैं भी सोचने लगा
रात दिन पोस्ट तैयार करके आप लोगों के लिए भेजते हैं..आखिर हमें क्या फायदा है...

महीने में पांच सौ रुपए का नेट पैक,सुबह से लेकर रात तक जग कर समय बर्बाद करने से क्या फायदा है

बिना मतलब के गाली और धमकियां हमें दी जाती है हमें क्या फायदा है...

बिना वजह हम लोगों से दुश्मनी मोल लेते हैं,अपने व अपने परिवार के लिए रिस्क उठाते हैं हमें क्या फायदा है...

काश यही बात हमारे महापुरुषों के समझ में आ गई होती ....
शंबुक से लेकर रविदास तक,फुले से लेकर पेरियार तक,अम्बेडकर से लेकर कांशीराम तक,शुरुआत से लेकर बहुजन मूवमेंट को आगे बढ़ाने वाले आज के महानुभाव तक
सब के सब मूर्ख हैं और थे क्या फायदा था उनको जातिवाद के खिलाफ खड़े होने से,अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने से,पाखण्ड का पोल खोलने से...

अपने सुख ,परिवार की चिंता किए बिना खुद शारीरिक मानसिक तनाव कष्ट का सामना करके हमारे आप के लिए संघर्ष करने से क्या फायदा मिला उनको..
तो मैं आप को फायदा बताता हू।

आज हमारे जीवन में जो कुछ भी है ए टू जेड सब हमारे महापुरुषों के त्याग ,बलिदान और संघर्षों कि वजह से है
अच्छा खाना, अच्छा घर,अच्छी गाडियां ,अच्छा शान आे शौकत,अच्छी शिक्षा,हो सकता है अच्छी नौकरी,अच्छा विजनेस,अच्छा रहन सहन,

ये किसी देवी देवताओं के आशीर्वाद से नहीं,या तुम्हारे अच्छे कर्मो की वजह से नहीं

ये हमारे महापुरुषों के संघर्ष व बलिदान की वजह से है...
एक बात आप लोग को मैं फिर से याद दिलाना चाहता
हूं जो बाबा साहेब ने कहा था"अगर तुम मेरे मिशन को आगे नहीं बढ़ा सकते तो पीछे भी मत जाने देना,,

तुम नहीं लड़ सकते मत लड़ो,तुम नहीं लिख सकते मत लिखो,तुम कुछ नहीं कर सकते तो मत करो...

लेकिन जो बाबा साहेब के मिशन को ,बहुजन मूवमेंट को आगे बढ़ा रहे हैं ,संघर्ष कर रहे हैं... कम से कम उनका तो मनोबल मत गिराओ,उनका सपोर्ट नहीं कर सकते,उनका साथ नहीं दे सकते तो उनका हौसला,हिम्मत तो ना तोड़ो...

उन सैकड़ों,हजारों मिशनरी साथीयों को हम दिल से धन्यवाद करते हैं प्रणाम करते हैं जो बाबा साहेब के मिशन,बहुजन मूवमेंट,बहुजन नायकों के विचारों को ,संविधान सुरक्षा को आगे बढ़ाने का काम लगातार बिना थके बिना रुके कर रहे हैं।

याद रहे हम जो कर रहे हैं,लड़ रहे हैं पूरे समाज के लिए कर रहे हैं...जिसका हिस्सा तुम भी हो..कहीं ना कहीं हम तुम्हारे हिस्से की लड़ाई भी हम लड़ रहे हैं...

अब आप सोचिए हमें फायदा क्या है....
और लास्ट में एक बात कहना चाहता हू
#जो_अपना_इतिहास_नहीं_जानता_उसका_कोई_भविष्य_नहीं_होता...

 #क्रान्तिकारी जय भीम    चार दिन पहले गुजरात में दलित दूल्हे को घोड़ी चढ़ने पर बारात में पत्थरबाजी की गई उस समय पता चला कि...
21/02/2020

#क्रान्तिकारी जय भीम
चार दिन पहले गुजरात में दलित दूल्हे को घोड़ी चढ़ने पर बारात में पत्थरबाजी की गई उस समय पता चला कि सिपाही होना भी व्यर्थ गया जातिवाद के आगे।
उसके बाद कानपुर में दलितों को बुद्ध कथा करने पर घर मे घुसकर मारा गया जिसमें 28 लोग घायल हो गए उसदिन पता चला कि सभी धर्म भी व्यर्थ है जातिवाद के आगे।
अब राजस्थान में दलितों को जितनी क्रूरता और बहशीपन से पीटा गया ऐसे स्पष्ट हुआ कि दल, नेता भी व्यर्थ है जातिवाद के आगे।

मैँ इस घटना को ठीक से बयां तक नहीं कर पा रही हूँ। इतना क्रूर आईएसआई जैसे आतंकी संगठनों का व्यवहार भी नहीं हो सकता है।
वीडियो देखकर इतना विचलित हूँ कि समझ नहीं आ रहा उन जातिवादियों को आतंकी कहूँ?
आरक्षण विरोधियों को दोष दूँ?
मठाधीशों को कोसूं?
धर्माचार्यों को ललकारुं?
कानून व्यवस्थापकों पर गरजूं?
राजनितिज्ञों को गाली दूँ या फिर समाज को इसी लायक समझूँ?
बड़ी विडंबना और बहुत दयनीय स्थिति है।

 #क्रान्तिकारी_जय_भीम     #श्लोक- "नारी च शुद्राम विद्या न दताम्,,        #मतलब - मनुस्मृति में साफ साफ लिखा है कि नारी ...
21/02/2020

#क्रान्तिकारी_जय_भीम
#श्लोक- "नारी च शुद्राम विद्या न दताम्,,
#मतलब - मनुस्मृति में साफ साफ लिखा है कि नारी और शुद्र को शिक्षा नहीं देना चाहिये.....
अब सवाल यह है कि जब नारी को शिक्षा का अधिकार ही नहीं था तो सरस्वती कौन सी स्कुल में पढ़कर शिक्षा की देवी बन गई.....
और जब शुद्र को शिक्षा का अधिकार नहीं था तो वाल्मिकी ने कैसे पुरा संस्कृत में ही #रामायण लिख दिया....?
हो सके तो तार्किक जबाब दिजीयेगा...
हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति संप्रदाय धर्म से नहीं है !
हमारी लड़ाई
भेदभाव छुआछूत ढोंग पाखंड अंधविश्वास एवं संविधान विरोधियों से है!

 #सुधर_जाओ SC, ST, OBC  #वालो वरना  #हिन्दुत्व ऐसे ही  #पिछवाड़े में  #पेचकस और  #पेट्रोल   #डालकर निकाला जाएगा #गर्व से ...
21/02/2020

#सुधर_जाओ SC, ST, OBC #वालो वरना #हिन्दुत्व ऐसे ही #पिछवाड़े में #पेचकस और #पेट्रोल
#डालकर निकाला जाएगा
#गर्व से कहो हम #हिन्दू हैं
#हिन्दू - #हिन्दू #भाई #भाई
देख लो #भाईचारा
हमें तो फिक्र है
कहाँ मर गया तुम्हारा #भाईचारा ?????
सब चुप पक्ष भी विपक्ष भी।
धार्मिक #संगठन भी,क्योंकि मामला #दलितों का है।
अगर यही #घटना किसी #अन्य के साथ होती तो अब तक न जाने कितनी #सरकारी #संम्पति स्वाहा हो जाती, अड़ जाते सिर्फ #फांसी की #सजा पर। पर ये तो सहते आए हैं #सदियों से #अत्याचारियों के #अमानवीय #अत्याचार। और सह जायेंगे। कुछ दिन बाद सब कुछ #सामान्य????
पर कब तक.... कब तक इन #जातिवादी #आतंकवादियों का कहर #दलितों पर टूटता रहेगा???
#विचारणीय है।

क्रान्तिकारी जय भीम   इस घटना पर एक प्रतिक्रिया यह भी आई हैं।👇🏻देखिए.....ये सांकेतिक हैं।क्यों चिल्लाते हो भाई !पेट्रोल ...
21/02/2020

क्रान्तिकारी जय भीम
इस घटना पर एक प्रतिक्रिया यह भी आई हैं।
👇🏻देखिए.....
ये सांकेतिक हैं।
क्यों चिल्लाते हो भाई !
पेट्रोल और पेचकस ही तो डाला है कौन सा स्वर्ग नरक छीन लिया तुमसे

जब बाबा साहेब को मानने की बारी आती है तो तुम जातीय संगठन को मजबुत करते हो

जब बुद्धिजीवी संविधान को मजबुत करने के लिए सभाये और परीक्षाये करवाना चाहते है तब तुम भजन संध्या टीवी और क्रिकेट में आनन्द लेना चाहते हो

जब बाबा साहेब ने बोला की शिक्षा पर पैसा खर्च करो तो तुम धर्म भीरू बनते हो गणेश और दुर्गा विसर्जन में कुदते फांदते हो

जब तक हिन्दु होने पर गर्व करते रहोगे तब तक ऐसे ही पिटते रहोगे
जब तक सवर्णो को दंबग मानते रहोगे ऐसे ही पिटते रहोगे
जब तक अपने बच्चों को शारीरिक रूप से मजबुत बनाने के लिए भीम शाखाएँ नहीं खोलोगे तब ऐसे ही पिटते रहोगे

जब तक मनुवाद के बनाये तीज त्यौहार और उनका सांस्कृतिक विरोध नहीं करोगे तब तक ऐसे ही पिटते रहोगे

याद रखो सारे शास्त्रों में तुम नीच हो
और ऐसों को पीटना बुरा नहीं माना जाता है🙏

👆
ये प्रतिक्रया है हो सकता है कोई साथी सहमत हो और कोई नही... पर विचारणीय है।

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Salempur Gopalganj

841405

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